सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ विधि-विधान से की पूजा-अर्चना
बिलासपुर-[जनहित न्यूज] बुधवार को माताओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर हलषष्ठी (हरछठ) का व्रत रखा। सुबह से ही महिलाओं ने गांधी चौक स्थित प्राचीन ठाकुरदेव मंदिर पहुंचकर व्रत का संकल्प लिया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलषष्ठी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल और मूसल माना जाता है, इसी कारण इस पर्व को हलषष्ठी नाम दिया गया। इस दिन माताएं व्रत रखकर अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की मंगल कामना करती हैं।
हलषष्ठी व्रत में विशेष नियमों का पालन किया जाता है। इस दिन हल से जुते हुए खेत का अनाज या अन्न ग्रहण नहीं किया जाता।

व्रत रखने वाली महिलाएं बिना हल चलाए उगाए गए पसहर चावल का प्रसाद के रूप में सेवन करती हैं। इसके अलावा पानी में उगने वाले फल जैसे सिंघाड़ा आदि भी ग्रहण किए जाते हैं।

पूजा-अर्चना में भैंस के दूध और दही का उपयोग किया जाता है, जबकि परंपरा के अनुसार इस दिन गाय के दूध और घी का सेवन नहीं किया जाता।
व्रत के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद संतान की कमर में कपड़े से बने पोता को मारने की परंपरा भी निभाई गई।

महराजिन शशि तिवारी ने बताया कि महिलाओं ने अपने बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
हलषष्ठी पर्व को लेकर घरों में पूरे दिन धार्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और परिवार की खुशहाली की कामना की।

