देर रात ढोल-नगाड़े और पटाखों के शोर पर टोकना पड़ा भारी जज और उनके परिजनों से मारपीट दूसरे पक्ष ने भी लगाए गंभीर आरोप काउंटर एफआईआर दर्ज…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] न्यायधानी बिलासपुर में अब देर रात तक तेज आवाज में ढोल-नगाड़े बजाने और पटाखे फोड़ने पर आपत्ति जताना भी विवाद और मारपीट की वजह बनता नजर आ रहा है। राजकिशोर नगर के जूनियर एमआईजी इलाके में जन्मदिन की एक पार्टी के दौरान ऐसा ही घटनाक्रम सामने आया, जिसने शहर की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि देर रात हो रहे शोर-शराबे का विरोध करने पहुंचे महासमुंद के कुटुंब न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी और उनके परिवार के साथ मारपीट की गई।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विवाद में न्यायाधीश, उनकी पत्नी और अन्य परिजनों के साथ मारपीट के आरोप लगे हैं। दूसरी ओर पार्टी में शामिल युवक ने भी न्यायाधीश और उनके परिवार पर हमला करने तथा कार चढ़ाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। यानी जन्मदिन की खुशी देखते ही देखते सड़क पर शक्ति प्रदर्शन और हिंसक टकराव में बदल गई। सरकंडा पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
45 मिनट तक गूंजते रहे ढोल-नगाड़े, बच्चों और बुजुर्गों की नींद हुई हराम:-
घटना 31 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पत्नी और परिजनों के साथ अपने ससुराल आए हुए थे। रात में परिवार के सदस्य सो रहे थे, तभी पड़ोस में आयोजित जन्मदिन की पार्टी में तेज आवाज में ढोल-नगाड़े बजने और पटाखे फोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया।
शिकायत के मुताबिक करीब 45 मिनट तक लगातार शोर होता रहा। इससे घर में मौजूद बच्चे और बुजुर्ग परेशान हो गए। आखिरकार न्यायाधीश शोर बंद कराने और समझाइश देने के लिए बाहर पहुंचे। वहां कथित तौर पर 100 से 200 लोगों की भीड़ मौजूद थी। शांतिपूर्वक आपत्ति जताने की कोशिश जल्द ही विवाद में बदल गई।
समझाइश पर भड़के लोग…! जज और परिजनों को घेरकर पीटने का आरोप
न्यायाधीश की शिकायत के अनुसार, देर रात तेज आवाज में नगाड़े बजाने और पटाखे फोड़ने से मना करने पर प्रॉपर्टी डीलर अभय बरुआ और उसके साथियों ने विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि देखते ही देखते गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। न्यायाधीश को जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है।
विवाद की जानकारी मिलने पर उनकी पत्नी आकांक्षा सोनवानी, साला अभिषेक भारद्वाज, सास नीरा भारद्वाज और साले की पत्नी गुरप्रीत कौर भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके परिजनों को भी घेरकर हाथ-मुक्कों से पीटा गया। मारपीट में न्यायाधीश की शर्ट के बटन टूटने और पत्नी व साले का चश्मा छीनने की बात भी सामने आई है।
दूसरा पक्ष भी नहीं रहा पीछे, न्यायाधीश पर लगाए मारपीट के आरोप:-
इस मामले में दूसरा पक्ष भी गंभीर आरोपों के साथ सामने आया है। मगरपारा निवासी विनय वैद्य (34) के अनुसार वह अपने दोस्त अभय बरुआ के घर जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने गया था। इसी दौरान पटाखे फोड़ने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
विनय का आरोप है कि आकांक्षा सोनवानी वहां पहुंचीं और अपने पति के न्यायाधीश होने का हवाला देते हुए गाली-गलौज करने लगीं। इसके बाद उनके पति लाठी लेकर मौके पर पहुंचे और मारपीट की। विनय ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक भारद्वाज कार लेकर वहां पहुंचा और उसे जान से मारने की नीयत से कार चढ़ाने की धमकी दी। शिकायत में उसके कंधे, पीठ और अंगूठे में चोट आने की बात कही गई है।
VIDEO के बाद उठे सवाल, आखिर कानून हाथ में लेने का अधिकार किसे…?
घटना से जुड़े वीडियो को लेकर भी चर्चा है। हालांकि वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों और घटनाक्रम की पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी को जन्मदिन या अन्य निजी आयोजन के नाम पर देर रात तक सार्वजनिक शांति भंग करने का अधिकार मिल जाता है…? और यदि कोई नागरिक शोर-शराबे पर आपत्ति जताता है तो क्या उसका जवाब मारपीट और धमकी से दिया जाएगा…?
न्यायधानी में इस तरह की घटनाएं नागरिक सुरक्षा, सामाजिक अनुशासन और कानून के सम्मान को लेकर चिंता पैदा करती हैं। कानून सबके लिए समान है। न किसी को पद का रौब दिखाने का अधिकार है और न ही भीड़ या रसूख के दम पर किसी को डराने-धमकाने का।
काउंटर FIR दर्ज, अब जांच में खुलेगी विवाद की पूरी परत-:

सरकंडा पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर FIR दर्ज कर ली है। पुलिस घटनास्थल पर मौजूद लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब निगाहें पुलिस की निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई, मारपीट किसने की और वीडियो में दर्ज घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है। जन्मदिन की खुशी के नाम पर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर कार्रवाई होगी या मामला आरोप-
प्रत्यारोप तक सिमट जाएगा इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा।

