7 घंटे चली चुनौतीपूर्ण सफल सर्जरी से अब सामान्यता चबा सकेगा युवक खाना…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के दंत चिकित्सा विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए बचपन से बंद मुंह और अविकसित जबड़े से पीड़ित 24 वर्षीय युवक को नई जिंदगी की उम्मीद दी है। करीब 7 घंटे चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद मरीज का मुंह धीरे-धीरे खुलना शुरू हो गया है और वह जल्द ही सामान्य लोगों की तरह भोजन चबा सकेगा।

मुंगेली जिले के अमलीकापा निवासी 24 वर्षीय मुकेश निषाद (बदला हुआ नाम) बचपन में लगी चोट के कारण बाइलेटरल टीएमजे एंकिलोसिस (B/L TMJ Ankylosis) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। चोट के कारण जबड़े का जोड़ विकसित नहीं हो पाया, जिससे उसका निचला जबड़ा अविकसित रह गया और बचपन से ही उसका मुंह पूरी तरह बंद था। वह केवल तरल पदार्थों का सेवन कर पाता था, जिसके कारण वह कुपोषण और शारीरिक कमजोरी का शिकार हो गया।
मरीज ने निजी अस्पतालों सहित कई जगह इलाज कराने का प्रयास किया, लेकिन लगभग तीन लाख रुपये से अधिक के संभावित खर्च के कारण उपचार नहीं करा सका। इसके बाद वह सिम्स पहुंचा, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका निःशुल्क इलाज किया गया।
दंत चिकित्सा विभाग ने खून की जांच, सीबीसीटी (CBCT), एक्स-रे एवं अन्य आवश्यक परीक्षणों के बाद 4 जून 2026 को ऑपरेशन किया। चूंकि मरीज का मुंह पूरी तरह बंद था, इसलिए पहले ट्रेकियोस्टॉमी के माध्यम से श्वास नली बनाकर उसे बेहोश किया गया। इसके बाद करीब 6 से 7 घंटे तक चली जटिल सर्जरी में डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस (Distraction Osteogenesis) तकनीक का उपयोग कर अविकसित निचले जबड़े को लंबा करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जबड़े के दोनों ओर विशेष उपकरण स्क्रू की सहायता से लगाए गए हैं, जिनकी मदद से अगले तीन से चार महीनों में जबड़ा धीरे-धीरे सामान्य आकार लेने लगेगा।
सर्जरी के बाद मरीज एक सप्ताह तक सिम्स में भर्ती रहा। वर्तमान में उसे नियमित फॉलोअप के लिए बुलाया जा रहा है और ऑपरेशन के मात्र एक सप्ताह बाद ही उसका मुंह धीरे-धीरे खुलना शुरू हो गया है, जिससे मरीज और उसके परिजनों में नई उम्मीद जगी है।
इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व दंत चिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश ने डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में किया। टीम में डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे और डॉ. सोनल पटेल शामिल रहे। वहीं निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्तान देवबरमा तथा रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि दंत एवं मुख रोग केवल दांतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका सीधा प्रभाव पोषण, बोलने की क्षमता, चेहरे के विकास और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम के समन्वय से सिम्स में जटिल से जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा रहा है और भविष्य में भी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध रहेगा।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि बचपन से जबड़ा बंद रहने जैसी दुर्लभ समस्याओं का समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि दांत एवं मुख संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उपचार कराएं ताकि गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।

