कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल का किया घेराव कलेक्टर व एसएसपी को सौंपा ज्ञापन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
न्यायधानी बिलासपुर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तोरवा स्थित हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर एक आदिवासी महिला का शव बकाया राशि के नाम पर रोकने के गंभीर आरोपों ने गुरुवार को पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया। मामले ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल का घेराव कर कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
दिनभर चले घटनाक्रम के बीच कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची। अधिकारियों ने इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की, पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कराई और बाद में महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया।
क्या है पूरा मामला:-
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, कोरिया जिले के ग्राम कामराजी निवासी जगन्नाथ प्रसाद ने 25 जुलाई को अपनी पत्नी तिलबसिया बाई (46 वर्ष) को अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल का कहना है कि छुट्टी के दिन परिजन मरीज को छोड़कर चले गए और बाद में उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद अस्पताल ने पुलिस को मरीज की मृत्यु की सूचना दी।
वहीं मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा किए बिना शव देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि आयुष्मान कार्ड प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें ₹84,400 का बिल थमा दिया गया। परिजनों का दावा है कि वे ₹31,700 से अधिक की राशि जमा करने के बाद भी शव नहीं ले जा सके। सांसद के हस्तक्षेप के बाद बढ़ा मामला मृतका के परिजनों ने क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना महंत से मदद की गुहार लगाई।
इसके बाद सांसद के निर्देश पर कांग्रेस नेता विजय केशरवानी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार के पक्ष में अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा। बाद में उन्होंने कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई तथा निजी अस्पतालों की मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण की
मांग की। एक दिन में तीन मामलों से उठे सवाल गुरुवार को सामने आए इस विवाद के साथ ही शहर में निजी अस्पतालों से जुड़े अन्य मामलों ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। व्यापार विहार स्थित एक निजी अस्पताल में 19 घंटे के इलाज के बाद मृतक के परिजनों को लगभग ₹4.75 लाख का बिल दिए जाने का मामला चर्चा में रहा। वहीं तोरवा क्षेत्र के एक अन्य नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में सर्जिकल धागा छोड़ने के आरोप भी सामने आए।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों के अधिकारों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

