सराफा एसोसिएशन ने SP और BIS को भेजा तकनीकी ज्ञापन…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] बिलासपुर में स्वर्ण शुद्धता को लेकर सामने आए विवाद ने अब तकनीकी और राष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग का रूप ले लिया है। बिलासपुर सराफा एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने 14 अगस्त को मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, सदर बाजार में सामने आए कैरेट टेस्टिंग विवाद को लेकर बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को विस्तृत तकनीकी ज्ञापन सौंपा है। साथ ही ज्ञापन की प्रतियां BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) रायपुर एवं दिल्ली को भी भेजी गई हैं।
सराफा संगठनों का कहना है कि मामला केवल एक ग्राहक या एक आभूषण की शुद्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि किसी टेस्टिंग मशीन से एक ही आभूषण की जांच में अलग-अलग प्यूरिटी सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है। संगठन ने जब्त की गई कैरेट टेस्टिंग मशीन की जांच स्थानीय स्तर पर कराने के बजाय राष्ट्रीय स्तर की सरकारी अथवा मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला से कराने की मांग की है।

14 अगस्त को सामने आया था मामला:-
सराफा संगठनों के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को मैसर्स मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, सदर बाजार, बिलासपुर में सुनील कुमार केशरी ज्वेलर्स द्वारा निर्मित 22 कैरेट HUID युक्त आभूषण की जांच के दौरान कथित तौर पर गंभीर विसंगति सामने आई। शोरूम की कैरेट टेस्टिंग मशीन में पहली जांच के दौरान आभूषण को 20 कैरेट बताया गया और HUID को लेकर भी सवाल उठे। वहीं पुनः जांच में उसी आभूषण की शुद्धता 916 यानी 22 कैरेट बताई गई।
घटना के बाद पुलिस द्वारा संबंधित कैरेट टेस्टिंग मशीन को जब्त किया गया है। अब सराफा संगठनों ने मशीन की तकनीकी विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण की मांग उठाई है।
नौ बिंदुओं पर तकनीकी जांच की मांग:-
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने मशीन की जांच के लिए नौ प्रमुख तकनीकी बिंदु रखे हैं। इनमें मशीन का मेक, मॉडल, सीरियल नंबर और तकनीकी विनिर्देश, कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र एवं उसका इतिहास, सॉफ्टवेयर अथवा फर्मवेयर में किसी भी प्रकार के बदलाव या छेड़छाड़ की जांच शामिल है।
इसके अलावा मशीन की Accuracy, Repeatability और Reproducibility का परीक्षण, प्रमाणित संदर्भ सामग्री से जांच, 20K एवं 22K/916 मानक नमूनों पर तुलनात्मक परीक्षण तथा आभूषण की सतह, स्थिति और ज्यामिति का मशीन के परिणाम पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच की मांग की गई है।
संगठन ने टेस्ट लॉग, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित DVR डेटा को सुरक्षित रखने तथा पूरी जांच ऐसी स्वतंत्र प्रयोगशाला से कराने की मांग की है, जिसका इस प्रकरण से किसी भी प्रकार का हित-संबंध न हो।
एक ही मशीन में अलग-अलग परिणाम क्यों…?
सराफा संगठनों ने सवाल उठाया है कि यदि एक ही आभूषण की जांच एक ही मशीन से अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्यूरिटी बताती है, तो इसके पीछे तकनीकी कारण क्या था, इसकी वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की जानबूझकर की गई गड़बड़ी सामने आती है, तो मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं रहेगा, बल्कि यह देशभर के उपभोक्ताओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
संगठन ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोषी ठहराना उनका उद्देश्य नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि मशीन, उसकी कार्यप्रणाली और उससे जुड़े सभी डिजिटल एवं तकनीकी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो और तथ्य सामने आएं।

यह किसी ब्रांड के विरोध में आंदोलन नहीं
सराफा संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी विशेष ब्रांड के विरोध में नहीं है। उनका उद्देश्य स्वर्ण व्यापार में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और उपभोक्ताओं के विश्वास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
एसोसिएशन का कहना है कि “सोना किसी पहचान का मोहताज नहीं, सोना अपने आप में ब्रांड है।” इसलिए स्वर्ण की शुद्धता जांचने वाली व्यवस्था भी ऐसी होनी चाहिए, जिस पर ग्राहक, व्यापारी और पूरा उद्योग समान रूप से भरोसा कर सके।
जांच पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
बिलासपुर सराफा एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने कहा है कि पुलिस अधीक्षक बिलासपुर के साथ-साथ BIS रायपुर और दिल्ली को तकनीकी मांगों से अवगत कराया गया है। संगठन का कहना है कि जब तक पूरे मामले की पारदर्शी, वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच नहीं होती तथा वास्तविक तथ्य सामने नहीं आते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जब्त कैरेट टेस्टिंग मशीन की स्वतंत्र तकनीकी जांच में क्या सामने आता है और 20 कैरेट तथा 916/22 कैरेट के कथित रूप से अलग-अलग परिणामों का वास्तविक कारण क्या था।
इसी प्रकार BIS की व्यवस्था में XRF testing की capability, accuracy, repeatability तथा testing methodology जैसे तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया जाता है।
अतः इस मामले में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि उक्त मशीन वर्तमान समय में क्या Reading दे रही है। यह भी वैज्ञानिक रूप से जांचना आवश्यक है कि इसी प्रकार BIS की व्यवस्था में XRF testing की capability, accuracy, repeatability तथा testing methodology जैसे तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया जाता है।
अतः इस मामले में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि उक्त मशीन वर्तमान समय में क्या Reading दे रही है। यह भी वैज्ञानिक रूप से जांचना आवश्यक है कि
- जब्त की गई Carat Testing/XRF Machine का Make, Model, Serial Number एवं Technical Specification क्या है।
- मशीन का वर्तमान Calibration Status, Calibration Certificate Calibration History तथा Calibration की Traceability क्या है।
- मशीन में प्रयुक्त Software/Firmware, उसकी Configuration तथा उपलब्ध Testing Parameters में किसी प्रकार का परिवर्तन अथवा अनियमितता तो नहीं हुई।
- मशीन की Accuracy, Repeatability और Reproducibility का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
- प्रमाणित एवं ज्ञात शुद्धता वाले Certified Reference Materials/Reference Samples के माध्यम से मशीन का परीक्षण कराया जाए।
- विभिन्न ज्ञात शुद्धता वाले Gold Samples, विशेषकर 20K, 22K/916 तथा अन्य उपयुक्त reference samples पर मशीन की Reading की तुलना की जाए।
- यह जांचा जाए कि Surface Condition, Testing Position, Sample Preparation, Jewellery Geometry अथवा अन्य Testing Parameters में परिवर्तन से Reading में कितना अंतर आ सकता है।
- मशीन के उपलब्ध Test Logs, Digital Records, Software Data एवं अन्य Technical Records सुरक्षित कर उनकी भी जांच की जाए।
- मशीन का परीक्षण किसी ऐसी स्वतंत्र सरकारी/प्राधिकृत एवं सक्षम तकनीकी प्रयोगशाला या विशेषज्ञ संस्था से कराया जाए, जिसका इस प्रकरण से कोई हित-
- संबंध न हो।

