कुछ हजार के कमीशन के लिए बैंक खाता दिया..करोड़ों की ठगी में फंसे…!
म्यूल अकाउंट बनाकर घुमाई जा रही ठगी की रकम बिलासपुर में 6 गिरफ्तार 50 शिकायतों से जुड़े करीब 4 करोड़ के लेन-देन का हुआ खुलासा…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] साइबर ठगी अब सिर्फ फर्जी कॉल, लिंक या ओटीपी तक सीमित नहीं रह गई है। साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को छिपाने और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए एक नया रास्ता तलाश लिया है।दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल। कुछ हजार रुपये के कमीशन का लालच देकर लोगों से बैंक खाते खुलवाए जाते हैं और फिर उन्हीं खातों को साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे खातों को आमतौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
बिलासपुर रेंज साइबर थाना ने इसी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के विरुद्ध देश के अलग-अलग राज्यों से 50 साइबर अपराध संबंधी शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में करीब 4 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े लेन-देन के तार मिले हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक खाते में महज 25 दिनों के भीतर 2 करोड़ 20 लाख 68 हजार 443 रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आया।

कमीशन छोटा, जोखिम बहुत बड़ा:-
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार करते थे और बदले में उन्हें 20 से 25 हजार रुपये तक कमीशन मिलने का लालच दिया जाता था। कुछ मामलों में खाते से होने वाले लेन-देन के आधार पर कमीशन देने की बात भी सामने आई।
अजय फार्म हाउस के नाम से संचालित एक खाते में 18 मई से 12 जून 2026 के बीच 25 दिनों में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। बैंक रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज, मोबाइल नंबर और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल करते-करते पुलिस ऐसे नेटवर्क तक पहुंची, जिसमें बैंक खाते उपलब्ध कराने, खातों में मोबाइल नंबर लिंक कराने, आवश्यक एप्लीकेशन डाउनलोड करने और बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल कराने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका सामने आई।
पुलिस ने अजय कुमार सोनी, अभिलाष कुमार डेनियल उर्फ चिंटू, भास्कर कश्यप, नरेन्द्र कुर्रे, आशीष तिवारी और देवेश कुमार दास उर्फ रोबिन को गिरफ्तार किया है।
बिलासपुर से कई राज्यों तक पहुंची साइबर ठगी की कड़ी:-
जांच का दायरा बढ़ा तो सामने आया कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ चंडीगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, झारखंड, मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों से शिकायतें दर्ज थीं।
अजय कुमार सोनी के खाते के संबंध में 21, भास्कर कश्यप के खाते के संबंध में 24, नरेन्द्र कुर्रे के खाते से जुड़ी 2 और आशीष तिवारी के खाते से संबंधित 3 शिकायतें सामने आईं। इस तरह कुल 50 शिकायतों में करीब 4 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े तार मिले हैं।
साइबर ठगों का ‘खाता किराए पर’ मॉडल
इस पूरे मामले ने साइबर ठगों के काम करने के एक खतरनाक तरीके को उजागर किया है। ठग सीधे अपने नाम के बैंक खाते में रकम लेने से बचते हैं। इसके बजाय वे ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जिन्हें आसानी से कुछ हजार रुपये का लालच दिया जा सके।
पहले बैंक खाता खुलवाया जाता है। फिर मोबाइल नंबर, एटीएम, नेट बैंकिंग अथवा अन्य बैंकिंग साधनों की जानकारी या नियंत्रण हासिल किया जाता है। इसके बाद साइबर अपराध से हासिल रकम उस खाते में पहुंचाई जाती है और वहां से कई दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है।
इस तरह रकम की वास्तविक कड़ी को छिपाने की कोशिश की जाती है। मेरा खाता है, जिम्मेदारी भी मेरी है। यह बात समझना जरूरी सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग यह मान लेते हैं कि खाता तो मेरे नाम पर है, लेकिन इस्तेमाल कोई और कर रहा है, इसलिए मेरी जिम्मेदारी नहीं होगी। ऐसा सोचना भारी पड़ सकता है। यदि आपके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन में होता है तो जांच एजेंसियां सबसे पहले उस खाते और उसके धारक तक पहुंचती हैं। इसके बाद खाताधारक को यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि खाते का इस्तेमाल किसने किया, बैंकिंग साधन किसे दिए गए और लेन-देन की जानकारी उसे थी या नहीं। यानी कुछ हजार रुपये का कमीशन पाने के चक्कर में व्यक्ति करोड़ों की साइबर ठगी की जांच के बीच पहुंच सकता है।
इन चीजों को कभी किसी के हवाले न करें
अपना बैंक खाता किराए पर या कमीशन के बदले इस्तेमाल के लिए न दें।
एटीएम/डेबिट कार्ड, पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी, बैंक से लिंक मोबाइल फोन या सिम किसी को न दें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम मंगाकर आगे ट्रांसफर न करें। किसी कंपनी या ऑनलाइन नौकरी के नाम पर खाता खुलवाकर बैंकिंग विवरण साझा करने से पहले पूरी जानकारी जांचें। मोबाइल में किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग या रिमोट-एक्सेस एप्लीकेशन इंस्टॉल न करें।
कमीशन का ऑफर दिखे तो समझिए खतरे की घंटी है:-
अगर कोई व्यक्ति आपसे कहता है।सिर्फ अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दो, हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन मिलेगा”, तो इसे कमाई का आसान जरिया समझने की गलती न करें। यह साइबर अपराधियों का जाल हो सकता है।
याद रखें। खाता आपका रकम किसी और की और अपराध साइबर ठगों का लेकिन जांच सबसे पहले आप तक पहुंच सकती है।
बिलासपुर रेंज साइबर थाना की यह कार्रवाई सिर्फ छह आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ा संदेश है जो बिना पूरी जानकारी के अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। साथ ही उन लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है, जो इन खातों का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और साइबर अपराध की नई कड़ियां सामने आने की संभावना है।

पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा नोडल अधिकारी गगन कुमार के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, कामिल हक सहित रेंज साइबर थाना के स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जनसंदेश:-
बैंक खाता कमाई का साधन है, किसी और के अपराध का रास्ता नहीं।
कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता किसी को न दें।क्योंकि एक गलत लेन-देन आपको साइबर अपराध की जांच के घेरे में ला सकता है।

