सिम्स में डॉक्टर-दवा और मल्टी
स्पेशियलिटी अस्पताल पर भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब… 17.24 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा मामले पर भी सवाल निरुत्तर…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सोमवार को बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता उस समय चर्चा में आ गई, जब केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का लंबा लेखा-जोखा पेश करने के बाद पत्रकारों ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवाल दागने शुरू किए। सिम्स और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की उपलब्धता तथा प्रस्तावित मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर सवाल पूछे गए, लेकिन इन मुद्दों पर विस्तृत जवाब सामने आने से पहले ही मंत्री हाथ जोड़कर प्रेसवार्ता से उठकर चले गए।
पहले योजनाओं की लंबी फेहरिस्त, फिर स्थानीय मुद्दों पर सवाल-:
सेवा संकल्प अभियान के तहत बस स्टैंड रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियां गिनाईं। प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, नल-जल योजना, खाद्यान्न योजना और किसान सम्मान निधि सहित कई योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनका लाभ देश के आम लोगों तक पहुंचा है।
मंत्री ने घर-घर शौचालय, सड़क, रेलवे कनेक्टिविटी, हाईवे विस्तार, जनजातीय क्षेत्रों में विकास और नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। आयुष्मान भारत के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के उपचार की व्यवस्था को भी उन्होंने उपलब्धि के रूप में सामने रखा।
यानी केंद्र की योजनाओं और उपलब्धियों का सिलसिला लंबा चला। लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने सवालों का रुख बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर किया, प्रेसवार्ता का माहौल बदलता नजर आया।
सिम्स और जिला अस्पताल पर सवाल, जवाब अधूरा-:
पत्रकारों ने सवाल किया कि संभागीय मुख्यालय के प्रमुख सरकारी अस्पताल सिम्स और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी कब दूर होगी…? मरीजों को पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए सरकार की क्या ठोस व्यवस्था है…? इसके साथ ही बिलासपुर में मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर सरकार की मौजूदा स्थिति और समयसीमा पर भी सवाल किया गया।
इन सवालों पर मंत्री की ओर से विस्तृत जवाब सामने नहीं आया। इसके बाद उन्होंने हाथ जोड़ते हुए मंच छोड़ा और वहां से चले गए।
यही घटनाक्रम प्रेसवार्ता का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
पत्रकारों की नाराजगी हम भोज के लिए नहीं आए हैं-:
मंत्री के प्रेसवार्ता से चले जाने पर मौजूद पत्रकारों ने नाराजगी जताई। पत्रकारों का कहना था कि प्रेसवार्ता केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाने का मंच नहीं, बल्कि पत्रकारों के सवालों का जवाब देने का अवसर भी है।
इस दौरान पत्रकारों की ओर से कहा गया आपने प्रेसवार्ता आयोजित की है, आपने बुलाया है तो आपको सवालों के जवाब देना चाहिए। हम भोज के लिए नहीं आए हैं।
इस टिप्पणी के बाद प्रेसवार्ता में सरकार की उपलब्धियों और स्थानीय समस्याओं पर जवाबदेही को लेकर चर्चा और तीखी हो गई।
‘एक रुपये में 15 पैसे’ का जिक्र, फिर 17.24 करोड़ के सवाल पर चुप्पी-:
प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस शासनकाल की व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उस राजनीतिक तर्क का उल्लेख किया, जिसमें केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से महज 15 पैसे ही नीचे तक पहुंचने की बात कही जाती थी।
लेकिन इसी दौरान पत्रकारों ने बिलासपुर के चर्चित सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में करीब 17.24 करोड़ की राशि से जुड़े सवाल भी उठाए। उपलब्ध जांच और पुलिस कार्रवाई से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच बिलासपुर जिले में 431 सर्पदंश मौतों के मामलों में 17.24 करोड़ मुआवजा वितरित किए जाने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए गड़बड़ी के आरोपों की जांच हुई है। मामले में डॉक्टर, लिपिक और अन्य लोगों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।
पत्रकारों ने इसी मामले में सरकार की स्थिति और आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल किया, लेकिन प्रेसवार्ता में इस पर भी कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
केंद्र की योजनाएं बनाम बिलासपुर के अस्पताल सवाल यहीं खड़ा है:-
प्रेसवार्ता में आयुष्मान भारत की उपलब्धियां गिनाई गईं, लेकिन पत्रकारों का सवाल सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की उपलब्धता पर था।
आवास और उज्ज्वला योजना की उपलब्धियां सामने रखी गईं, लेकिन सवाल था कि सिम्स में मरीजों को बेहतर विशेषज्ञ उपचार कब मिलेगा…?
विकास और कनेक्टिविटी की बात हुई, लेकिन बिलासपुर के मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल की स्थिति पर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई।
यही वजह रही कि योजनाओं की उपलब्धियों से शुरू हुई प्रेसवार्ता स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था के सवालों पर आकर चर्चा का विषय बन गई।
स्वास्थ्य मंत्री से बिलासपुर के सीधे सवाल
सिम्स में डॉक्टरों की कमी दूर करने की ठोस कार्ययोजना क्या है…?
जिला अस्पताल में दवाइयों की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी…?
मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर सरकार की वर्तमान स्थिति और समयसीमा क्या है…?
गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की मजबूरी कब कम होगी?
17.24 करोड़ के कथित सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में सरकार की वर्तमान आधिकारिक स्थिति क्या है?
इनमें से कई सवालों के जवाब प्रेसवार्ता में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सके।
प्रेसवार्ता खत्म हुई, लेकिन सवाल नहीं
स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं की उपलब्धियां गिनाईं और कांग्रेस शासनकाल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। लेकिन जब पत्रकारों ने राष्ट्रीय योजनाओं से चर्चा को बिलासपुर की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर मोड़ा तो प्रेसवार्ता जवाबों से पहले ही समाप्त हो गई।
अब बिलासपुर में चर्चा सिर्फ योजनाओं के आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन योजनाओं के जमीनी असर की भी है।
क्योंकि सवाल सीधा है सरकारी योजनाओं की फेहरिस्त कितनी भी लंबी क्यों न हो, सिम्स में मरीज को डॉक्टर, अस्पताल में दवा और गंभीर बीमारी में विशेषज्ञ इलाज आखिर कब मिलेगा…?
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