‘हमर पहुना’ में पहुंचे पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने शहर की बुनियादी समस्यायों पर दिए तगड़े तर्क…
बोले…
जलभराव के स्थायी समाधान निर्बाध बिजली एयरपोर्ट विस्तार और अरपा संरक्षण पहली प्राथमिकता…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] बिलासपुर की पहचान किसी नेता के मंत्री बनने या न बनने से नहीं, बल्कि शहर के विकास और जनता को मिलने वाली सुविधाओं से तय होती है। जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान, निर्बाध बिजली आपूर्ति और विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता लाना जरूरी है। जनता ने दोबारा विधायक बनने का अवसर दिया तो इन मुद्दों पर पूरी गंभीरता से काम करूंगा। यह बात पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने रविवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के पारंपरिक संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में कही। उन्होंने दो टूक कहा कि राजनीति में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण काम और जनता के प्रति जवाबदेही है।
राघवेंद्र राव सभा भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पांडेय ने अपने राजनीतिक सफर, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में किए गए कार्यों के साथ बिलासपुर के भविष्य से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे। एयरपोर्ट विस्तार, अरपा नदी का संरक्षण, नगर निगम सीमा विस्तार, बी-ग्रेड सिटी का दर्जा, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा, बिजली व्यवस्था और कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने शहर के विकास के लिए दीर्घकालिक योजना, मजबूत इच्छाशक्ति और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को जरूरी बताया।
मंत्री पद नहीं मिला तो क्या, बिलासपुर का कद कम नहीं होता-:

प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए पांडेय ने कहा कि विधायक के पहले कार्यकाल में सीखने और अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है। मंत्रिमंडल का गठन करना और अपनी टीम का चयन करना मुख्यमंत्री का अधिकार होता है। किसी व्यक्ति के मंत्री बनने या नहीं बनने से बिलासपुर का राजनीतिक महत्व कम नहीं हो जाता।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है और इसकी पहचान किसी एक व्यक्ति के पद से नहीं हो सकती। उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर काम करना और शहर की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।
एयरपोर्ट विस्तार के लिए विधानसभा में उठाई आवाज-:

बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास और हवाई सेवाओं के विस्तार को शहर की प्रगति से जोड़ते हुए पांडेय ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में इस विषय को प्रमुखता से उठाया था। एयरपोर्ट की थ्री-सी श्रेणी, नाइट लैंडिंग की सुविधा और विभिन्न शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू करने की दिशा में प्रयास किए गए।
उन्होंने बिलासपुर एयरपोर्ट का नाम ‘बिलासा देवी केंवटीन एयरपोर्ट’ रखने के लिए विधानसभा में संकल्प लाने की अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस संकल्प को सदन के सभी सदस्यों का समर्थन मिला था। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार, उद्योग, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए एयरपोर्ट का विस्तार बिलासपुर के विकास की महत्वपूर्ण जरूरत है।
अरपा सिर्फ नदी नहीं, बिलासपुर की पहचान
अरपा नदी को बिलासपुर की सांस्कृतिक, भावनात्मक और पर्यावरणीय पहचान बताते हुए पांडेय ने कहा कि नदी का संरक्षण शहर के भविष्य से जुड़ा विषय है। शिवघाट और अन्य प्रस्तावित बैराजों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं का उद्देश्य नदी में पानी बनाए रखने और शहर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करना था।
उन्होंने अरपा संरक्षण के लिए हुए आंदोलनों और पदयात्राओं को याद करते हुए कहा कि शहर को सुंदर, व्यवस्थित और बेहतर बनाने के लिए नदी संरक्षण, जल निकासी और आधारभूत सुविधाओं पर एक साथ काम करना होगा।

बारिश में जलभराव की समस्या पर उन्होंने स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, हर साल सामने आने वाली इस परेशानी से निजात पाने के लिए तात्कालिक उपायों के बजाय सुनियोजित ड्रेनेज सिस्टम और दीर्घकालिक विकास योजना पर काम करना जरूरी है।
10 किलोवाट का सोलर सिस्टम, फिर भी 9 से 10 हजार का बिजली बिल
बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों पर सवाल उठाते हुए पांडेय ने अपने घर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनके निवास पर 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा होने के बावजूद हर महीने करीब 9 से 10 हजार रुपये का बिजली बिल आता है।
उन्होंने सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली की खरीद और उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली की दरों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सौर ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं को इसका उचित लाभ मिलना चाहिए और बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही, शहरवासियों को बार-बार बिजली गुल होने की समस्या से राहत दिलाना भी जरूरी है।
बी-ग्रेड सिटी का दर्जा और नगर निगम सीमा विस्तार जरूरी-:
बिलासपुर को बी-ग्रेड सिटी का दर्जा दिलाने और नगर निगम की सीमा के विस्तार पर चर्चा करते हुए पांडेय ने कहा कि चुनाव के दौरान रेलवे और राज्य सरकार के कर्मचारियों ने इस विषय को उनके सामने उठाया था। इस दर्जे का महत्व कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं और शहर के विकास से जुड़े लाभों के लिहाज से भी है।
उन्होंने बताया कि इस दिशा में तत्कालीन कलेक्टर और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ प्रयास किए गए थे। उन्होंने पत्रकारों से इस मामले की वर्तमान स्थिति की पड़ताल करने का आग्रह करते हुए कहा कि शहर के हित में इस विषय को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
गरीब बच्चों को भी मिले अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने का अवसर-:
शिक्षा के क्षेत्र में अपने करीब दो दशक के अनुभव साझा करते हुए पांडेय ने बताया कि उन्होंने लगभग दस वर्ष डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय और करीब दस वर्ष कंप्यूटर शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में काम किया। शुरुआती दौर में छत्तीसगढ़ के गांवों और स्कूलों तक कंप्यूटर शिक्षा पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उस समय इंटरनेट और तकनीकी संसाधन सीमित थे।
उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा, प्रशिक्षकों को तैयार करने और ई-गवर्नेंस के प्रयासों का उल्लेख करते हुए भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से संबंधित ‘भुइयां’ सॉफ्टवेयर का भी जिक्र किया।
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की जरूरत पर उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अभिभावक भी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन निजी स्कूलों की फीस उनके लिए बड़ी बाधा बन जाती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर में अंग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू करने की दिशा में प्रयास किए गए। उन्होंने तिलक नगर, दयालबंद और लाला लाजपत राय क्षेत्र के स्कूलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छी शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार होना चाहिए।
कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद को बताया जीवन की बड़ी परीक्षा-:
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौर को याद करते हुए पांडेय भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में मजदूर, ऑटो चालक, हमाल और अन्य जरूरतमंद लोग भोजन तथा राशन की सहायता के लिए उनके निवास पर पहुंचते थे। उन्होंने सुबह से देर रात तक लोगों की मदद करने का प्रयास किया। इसी दौरान वे स्वयं भी कोरोना संक्रमित हो गए थे।
उन्होंने बताया कि उनके निवास पर लोगों की भीड़ जुटने के बाद एफआईआर भी दर्ज हुई थी। इस अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के समय जरूरतमंदों के साथ खड़ा रहना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने महामारी से मिले अनुभवों के आधार पर स्वास्थ्य सुविधाओं, अस्पतालों और प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने की जरूरत भी बताई। युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता युवाओं में हुक्का सेवन की समस्या पर चिंता जताते हुए पांडेय ने कहा कि इस विषय की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और पुलिस के साथ कार्रवाई की पहल की थी। उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया। उनके मुताबिक, युवाओं को नशे से बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई, सख्त कानून और परिवार, प्रशासन तथा समाज के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
बेटी के टिफिन ने सिखाया खाना बनाना-:
राजनीति और जनसेवा से इतर बातचीत के दौरान पांडेय ने अपने निजी जीवन का एक दिलचस्प प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि दूसरी बेटी के जन्म के समय उनकी पत्नी की तबीयत को लेकर काफी परेशानी थी। ऐसे में बड़ी बेटी को सुबह स्कूल के लिए तैयार करने और उसका टिफिन बनाने की जिम्मेदारी उन्होंने खुद संभाली।
सुबह पांच बजे घर में सहयोगी उपलब्ध नहीं होता था, इसलिए उन्होंने खाना बनाना सीखा। आज भी उन्हें आलू-पालक, आलू-मेथी, भरवां बैंगन, करेला फ्राई, आलू-गोभी, भिंडी, खिचड़ी और खीर जैसे व्यंजन बनाना पसंद है। उन्होंने कहा कि भोजन स्वादिष्ट होने के साथ देखने में भी अच्छा होना चाहिए, लेकिन सबसे जरूरी है कि उसे प्यार से बनाया जाए।
बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के राजनीति में रखा कदम-:
अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताते हुए पांडेय ने कहा कि वे मैकेनिकल इंजीनियर हैं और वर्ष 1997 में रविशंकर विश्वविद्यालय से शिक्षा पूरी की थी। उनका कोई राजनीतिक पारिवारिक आधार नहीं था और शुरुआत में राजनीति में आने की योजना भी नहीं थी। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रोत्साहन को राजनीति में प्रवेश का अवसर बताया। साथ ही भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव और चरणदास महंत से मिले सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार जताया।
उन्होंने पत्रकारों से संवाद को सीखने और समाज की समस्याओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। पांडेय ने कहा कि पत्रकार जनहित के मुद्दों को सामने लाने और जनप्रतिनिधियों तक जनता की आवाज पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए वे पत्रकारों से दूरी बनाने के बजाय खुलकर बातचीत करना पसंद करते हैं।
चुनावी हार-जीत से बड़ी है जनता के प्रति जिम्मेदारी-:

कार्यक्रम के अंत में पांडेय ने बिलासपुर की जनता से मिले प्यार और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार राजनीति का हिस्सा हैं, लेकिन जनता के प्रति जिम्मेदारी चुनाव परिणामों के साथ समाप्त नहीं होती। शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं और जनहित के मुद्दों पर लगातार संवाद और प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी सहित वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब के सदस्य उपस्थित रहे। पांडेय ने प्रेस क्लब की कार्यकारिणी द्वारा आमंत्रित करने और सम्मान देने के लिए आभार जताया।
‘हमर पहुना’ में पांडेय के वक्तव्य का केंद्रीय संदेश यही रहा कि बिलासपुर के विकास को राजनीतिक पदों की चर्चा से आगे बढ़ाकर बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और जनसमस्याओं के स्थायी समाधान पर केंद्रित किया जाना चाहिए।

