आधुनिक इम्प्लांट से घुटनों की कार्यक्षमता सुधारने की लोकहित पहल…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग में मोबाइल बेयरिंग इम्प्लांट तकनीक से एक मरीज के दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण (बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट) किया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य घुटनों के दर्द से राहत दिलाने और मरीज की चलने-फिरने की क्षमता में सुधार लाना है। आधुनिक तकनीक से की गई यह सर्जरी मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थान के प्रयासों को दर्शाती है।
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन के नेतृत्व में डॉ. तरुण सिंह एवं डॉ. रौनक ने सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया। पीजी रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. आकर्ष गुप्ता एवं डॉ. राहुल ने भी सर्जरी और मरीज की देखभाल में योगदान दिया। वहीं, एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम ने संभाली। सर्जरी के दौरान मरीज की हृदय गति, रक्तचाप, ऑक्सीजन स्तर सहित अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक मानकों की लगातार निगरानी की गई।
मोबाइल बेयरिंग तकनीक से घुटनों की प्राकृतिक गति में मदद
मोबाइल बेयरिंग टोटल नी रिप्लेसमेंट में इम्प्लांट के भीतर लगाई जाने वाली विशेष पॉलीएथिलीन की गद्दी को सीमित रूप से घूमने या खिसकने की सुविधा होती है। इससे घुटने की गति को अधिक स्वाभाविक बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके परिणाम मरीज की शारीरिक स्थिति, इम्प्लांट के उचित प्रत्यारोपण और घुटने के लिगामेंट के संतुलन पर निर्भर करते हैं। सही मरीज का चयन और सर्जरी के बाद नियमित फिजियोथेरेपी बेहतर परिणामों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रत्यारोपण के बाद मरीज को दर्द नियंत्रित करने, घुटने की गति बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए चिकित्सकीय निगरानी में पुनर्वास कराया जाता है। मरीज की स्थिति के अनुसार बैठने, खड़े होने और धीरे-धीरे चलने का अभ्यास शुरू किया जाता है, जिससे दैनिक गतिविधियों में उसकी भागीदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में मरीजों को सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। जटिल जोड़ प्रत्यारोपण में विशेषज्ञ चिकित्सकों और एनेस्थीसिया टीम के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है। आधुनिक तकनीक के साथ मरीज की जरूरत के अनुरूप उपचार और सर्जरी के बाद पुनर्वास पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। संस्थान का प्रयास है कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और वे बेहतर स्वास्थ्य के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में विभिन्न विभागों के समन्वय से मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण एक जटिल शल्य प्रक्रिया है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों, एनेस्थीसिया टीम और पुनर्वास सेवाओं की अहम भूमिका रहती है। मरीज की सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सिम्स के अस्थि रोग विभाग में की गई यह सर्जरी आधुनिक जोड़ प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख और व्यवस्थित पुनर्वास के जरिए मरीजों को दर्द से राहत दिलाने तथा उनकी गतिशीलता बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सिर्फ सिम्स अस्पताल में यह सर्जरी हुई है।

