हैदराबाद से लौटते ही रची वारदात की साजिश साथी को निगरानी में लगाकर घर में घुसा मुख्य आरोपी…
हत्या को सामान्य मौत दिखाने की कोशिश
दो आरोपी गिरफ्तार…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने अंधेकत्ल की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, दूसरे युवक से बातचीत करने की शंका और प्रेम संबंध में विवाद के चलते मुख्य आरोपी अजीत घृतलहरे ने बालिका की गला घोंटकर हत्या कर दी। वारदात में उसका साथी साहिल खाण्डे भी शामिल था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।
बिस्तर पर अचेत मिली थी किशोरी, गले पर थे चोट के निशान
पुलिस के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 की रात ग्राम नेवासपुर निवासी उत्तम मोहले को सूचना मिली कि उनकी 17 वर्षीय नातिन बिस्तर पर बेहोशी की हालत में पड़ी है और आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर बालिका को अचेत अवस्था में पाया। उसके गले पर चोट और खरोंच के निशान थे। दाहिने हाथ और पैर पर भी धब्बेनुमा निशान मिले।
सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर मर्ग कायम किया गया और जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामला हत्या का पाए जाने पर अपराध क्रमांक 343/2026, धारा 103 बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
दूसरे युवक से बातचीत की शंका पर हुआ था विवाद-:
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देश पर सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा तथा एसडीओपी आशीष अरोरा के मार्गदर्शन में पुलिस ने संदेहियों से पूछताछ और साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतिका का ग्राम लिलवाकापा निवासी अजीत घृतलहरे के साथ प्रेम संबंध था। दोनों परिवारों के बीच बालिग होने पर विवाह को लेकर चर्चा भी चल रही थी। पुलिस के मुताबिक, अजीत बालिका को आर्थिक सहायता भी देता था। करीब एक वर्ष पहले उसे जानकारी मिली कि बालिका किसी अन्य युवक से बातचीत करती है। इस बात को लेकर दोनों के बीच फोन पर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान अजीत ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी।
साथी को निगरानी में लगाया, खुद दीवार फांदकर घर में घुसा-:

पुलिस की जांच के अनुसार, 16 अक्टूबर को हैदराबाद से गांव लौटने के बाद अजीत ने अपने साथी साहिल खाण्डे को बालिका के दूसरे युवक के संपर्क में होने की बात बताई। इसके बाद 19 अक्टूबर की रात दोनों मोटरसाइकिल से ग्राम नेवासपुर पहुंचे।
पुलिस के मुताबिक, अजीत ने साहिल को कुछ दूरी पर आने-जाने वालों पर नजर रखने के लिए कहा और खुद घर की दीवार फांदकर अंदर दाखिल हो गया। घर के भीतर बालिका को फोन पर बातचीत करते देखकर उसने विवाद शुरू कर दिया। विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच हाथापाई हुई और वे निर्माणाधीन कमरे में गिर गए। इसी दौरान अजीत ने कथित तौर पर बालिका का गला दोनों हाथों से दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी ने बालिका के शव को दूसरे कमरे में बिस्तर पर लिटा दिया, ताकि मौत सामान्य प्रतीत हो। वह चाहता था कि मृत्यु हार्ट अटैक जैसी लगे। इसके बाद अजीत ने अपने साथी साहिल को हत्या की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, दोनों इसके बाद कवर्धा क्षेत्र में देवी दर्शन के लिए गए और रात करीब 2:30 बजे घर लौट आए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि:-
पुलिस ने संदेह के आधार पर अजीत को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान उसने हत्या करना स्वीकार किया। इसके बाद घटना के समय सहयोग करने के आरोप में साहिल को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालिका की मौत गला घोंटने और दम घुटने से होने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान साक्ष्य छिपाने से संबंधित धारा 238 और साझा आपराधिक दायित्व से संबंधित धारा 3(5) बीएनएस भी जोड़ी गई। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त होंडा लियो मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 28 जे 7143 जब्त की है।

दोनों आरोपी जेल दाखिल
पुलिस ने इस मामले में अजीत घृतलहरे (22), पिता शिवकुमार, और साहिल खाण्डे (20), पिता दिलीप, दोनों निवासी ग्राम लिलवाकापा, थाना सिटी कोतवाली, जिला मुंगेली को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस अंधेकत्ल का खुलासा करने वाली टीम में थाना सिटी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार वैष्णव, साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक सत्येंद्र पुरी गोस्वामी, प्रधान आरक्षक, सहायक उपनिरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों तक पहुंचने और साक्ष्य जुटाने का काम किया।
नोट आरोपियों के विरुद्ध मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। घटनाक्रम और आरोपों का विवरण पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है।

