मेडिकल कैंप, रक्तदान अन्न-वस्त्र वितरण और भंडारे से दिया मानव सेवा का संदेश ‘छत्तीसगढ़ स्टार नाइट’ में कलाकारों ने भजनों से बांधा समां देश-विदेश के शदाणी दरबारों में भी सेवा कार्य जारी…!
रायपुर-
[जनहित न्यूज़]
सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानव सेवा की समृद्ध परंपरा के प्रतीक पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में प्रथम सतगुरु परम पूज्य संत शदाराम साहिब जी एवं अष्टम सतगुरु परम पूज्य संत गोविंदराम साहिब जी का अवतरण महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 318 वर्ष पुरानी संत परंपरा के इस पावन आयोजन में जहां भजन-कीर्तन और सत्संग से आध्यात्मिक वातावरण भक्तिमय बना, वहीं मेडिकल कैंप, रक्तदान, अन्न-वस्त्र वितरण, प्रसाद और भंडारे जैसे सेवा कार्यों ने मानवता और परोपकार का संदेश दिया। वर्तमान पीठाधीश्वर संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में आयोजित महोत्सव में देश-विदेश के शदाणी दरबारों में भी विभिन्न सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
संत परंपरा की विरासत, मानव सेवा का संकल्प:-
शदाणी दरबार की संत परंपरा केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के दुख-दर्द को समझने, जरूरतमंदों की सहायता करने और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा भी देती है। इस परंपरा की नींव प्रथम सतगुरु संत शदाराम साहिब जी ने ऐसे दौर में रखी, जब समाज अनेक प्रकार की कठिनाइयों और चुनौतियों से गुजर रहा था। पीड़ितों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता तथा मानव कल्याण की भावना इस परंपरा के मूल में रही है।

आठवें सतगुरु परम पूज्य संत गोविंदराम साहिब जी ने आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई दिशा दी। शदाणी संवत के अनुसार कैलेंडर प्रकाशन की शुरुआत इसी परंपरा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। विभाजन के बाद सिंध, पाकिस्तान में रह गए हिंदुओं की कठिनाइयों और बिछड़े हुए लोगों की पीड़ा को देखते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच प्रोटोकॉल एग्रीमेंट के माध्यम से तीर्थस्थलों और लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। यह परंपरा आज भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ा रही है।
रायपुर स्थित शदाणी दरबार की भव्य इमारत भी सनातन वैदिक संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र मानी जाती है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भजन-कीर्तन, गंगा स्नान और सत्संग से हुआ शुभारंभ:-
अवतरण महोत्सव के कार्यक्रमों की शुरुआत आशा दीवार, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता के सत्संग से हुई। इसके बाद संतों के गंगा स्नान, पंचामृत स्नान, पूजन और आरती के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सार्वभौम दास जी महाराज एवं वृंदावन के प्रियावल्लभ जी ने सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। महाप्रसाद वितरण के साथ सभी के सुख, शांति और कल्याण की कामना की गई।
दिनभर दरबार परिसर में प्रसाद वितरण, भंडारा तथा अन्न-वस्त्र वितरण जैसे सेवा कार्य चलते रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर संत परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
‘छत्तीसगढ़ स्टार नाइट’ में भजनों की गूंज, कलाकारों ने बांधा समां:-
महोत्सव की संध्या का प्रमुख आकर्षण ‘छत्तीसगढ़ स्टार नाइट’ रही। विशाल जनसमूह के बीच छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कलाकारों ने भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। चंपा निषाद, प्रसन्ना राजेश अवस्थी, गरिमा जैन, चैतन्य देशमुख, ह्यूमन साहू, अमित चिमनानी तथा बलदेव चावला सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच उपस्थित श्रद्धालु देर तक भावविभोर नजर आए।

इस अवसर पर वृंदावन, काशी और अमरकंटक सहित विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाया।
आस्था के साथ सेवा, यही है शदाणी दरबार का संदेश-:
शदाणी दरबार का अवतरण महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। एक ओर संतों की वाणी और भजनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा दी, तो दूसरी ओर सेवा कार्यों ने जरूरतमंदों के प्रति संवेदना और सहयोग की भावना को मजबूत किया।
318 वर्ष पुरानी संत परंपरा की यह विरासत आज भी सेवा, सद्भाव, सनातन संस्कृति और मानव कल्याण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। महोत्सव का संदेश स्पष्ट है।सच्ची श्रद्धा वही है, जो भक्ति के साथ मानव सेवा और लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।

