बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर कहते हैं, सच्चा दान वही है जो किसी के जीवन को नया सवेरा दे। सिंधी कॉलोनी निवासी श्रीमती हर्षा थदानी जी ने मरणोपरांत नेत्रदान कर इस कथन को साकार कर दिया। उनके इस पुण्य कार्य से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाले की किरण जगी है।
शुक्रवार को श्री भगवान दास थदानी जी की धर्मपत्नी, श्रीमती हर्षा थदानी जी का स्वर्गवास हो गया। दुःख की इस घड़ी में भी परिवार ने मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पुत्र विक्की थदानी, संजू थदानी एवं भतीजे अजय (अज्जू) तोलानी ने नेत्रदान के लिए तत्परता दिखाते हुए हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया।
हैंड्स ग्रुप से सुनील तोलानी एवं अन्य सदस्यों ने सिम्स अस्पताल के डॉ. अन्नू तोमर व डॉ. कुणाल सिंह की टीम के साथ दिवंगत के निवास पर पहुंचकर सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत सम्मान और संवेदनशीलता के साथ संपन्न हुई।
आज भी समाज में ऐसे अनेक लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, नेत्रज्योति की प्रतीक्षा में हैं। श्रीमती हर्षा थदानी जी का यह निर्णय उन सभी के लिए आशा की लौ है। उनका नेत्रदान यह संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन दिया जा सकता है।
नेत्रदान मानवता का सबसे बड़ा उपहार
नेत्रदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी के अंधकारमय जीवन में प्रकाश भरने का माध्यम है। एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों को नई दृष्टि दे सकता है।
नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी…
समय का महत्व…मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान आवश्यक है।
•सरल प्रक्रिया… केवल 10–15 मिनट में पूरी हो जाती है, चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती।
कौन कर सकता है: किसी भी उम्र का व्यक्ति, चश्माधारी, मधुमेह या बीपी से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकता है।
गोपनीयता.. दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रहती है।
नेत्रदान हेतु तुरंत उठाए जाने वाले कदम
निकटतम आई बैंक से तुरंत संपर्क करें।
आंखों को धीरे से बंद कर उन पर गीली रुई रखें। कमरे का पंखा बंद करें, संभव हो तो ए.सी. चलाएं।
सिर के नीचे तकिया रखकर उसे थोड़ा ऊंचा रखें। श्रीमती हर्षा थदानी का यह पुण्य कार्य समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है देह नश्वर है।
पर किया गया दान अमर होता है।
आइए, हम सभी नेत्रदान के लिए आगे आएं और किसी के जीवन में रोशनी बनें।

