सराफा के प्रदेशाध्यक्ष कमल सोनी बोले…अब सरकार 75 साल पुरानी समस्याओं का करे समाधान…!
रायपुर/बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक साल सोना न खरीदने’ की अपील को राष्ट्रहित में समर्थन देते हुए छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने अब सरकार के सामने सराफा व्यापार और स्वर्ण शिल्पकारों से जुड़ी 5 बड़ी मांगें रख दी हैं। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि सराफा समाज देशहित में त्याग करने को तैयार है, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार भी दशकों से लंबित समस्याओं का समाधान करे।
श्री सोनी ने कहा कि 12 मई को प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री की अपील का सबसे पहले समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि सराफा समाज राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए एक साल तक संयम रखने को तैयार है, लेकिन इसके बदले सरकार को वर्षों से लंबित न्याय देना होगा।
उन्होंने सराफा व्यापारियों और स्वर्णकार समाज की ओर से पांच सूत्रीय मांगें रखते हुए कहा कि बड़े ब्रांडेड घरानों द्वारा “0% मेकिंग चार्ज” जैसे भ्रामक विज्ञापनों पर कानूनी रोक लगाई जाए तथा MRP प्रणाली लागू हो। साथ ही देशभर के करीब 50 हजार कारीगर परिवारों के हित में केंद्र और राज्यों में स्वर्ण शिल्प कला बोर्ड का गठन किया जाए, ताकि उन्हें बीमा, पेंशन और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिल सकें।
एसोसिएशन ने MCX गोल्ड ट्रेडिंग को भी बंद करने की मांग उठाई। श्री सोनी ने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारण पारंपरिक सराफा व्यापार प्रभावित हो रहा है और राष्ट्रहित में इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। इसके अलावा हॉलमार्किंग की HUID प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार और तकनीकी विसंगतियों को दूर कर छोटे व्यापारियों को राहत देने की मांग की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि अनजाने में खरीदे गए चोरी के सामान के मामलों में व्यापारियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई को सरल और न्यायसंगत बनाया जाए, ताकि निर्दोष व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
श्री सोनी ने स्पष्ट कहा, हम एक साल संयम रखेंगे, सरकार सालों का न्याय हमें दे। तिजोरी में बंद सोना तभी देश का ग्रोथ इंजन बनेगा, जब कारीगर बचेगा और व्यापार बचेगा।
उन्होंने देशभर के सराफा, स्वर्णकार और सोनी समाज के संगठनों से अपील की कि अगले सात दिनों के भीतर हर जिले से मुख्यमंत्री, सांसद और प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपकर इन मांगों को मजबूती से उठाया जाए।

