भोजली की गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का होगा सम्मान…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं को सहेजने की दिशा में मां बिलासा लोक संस्कृति एवं कला मंच, पचरीघाट, जूना बिलासपुर द्वारा 29 अगस्त को भव्य भोजली महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। पचरीघाट स्थित भोजली विसर्जन स्थल पर दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और सामाजिक सहभागिता का अनूठा संगम बनेगा।
आयोजन की जानकारी मंच के किशन लाल केंवट, शिवप्रताप साव, पार्षद आशीष गुप्ता, एल्डरमैन योगेश बोले एवं देवेंद्र पाठक ने बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भोजली पर्व की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित करते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां बनेंगी आकर्षण
महोत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति एवं पारंपरिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां होंगी। भोजली समितियों एवं प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली समितियों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। वहीं अन्य प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहित करने के लिए सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का होगा सम्मान
आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

दिग्गज अतिथियों की रहेगी मौजूदगी
भोजली महोत्सव में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। नगर निगम की महापौर पूजा अशोक विधानी सहित सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक अतिथियों की भी उपस्थिति रहेगी।
मां अरपा की होगी महाआरती:-
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण महिला मंडल द्वारा आयोजित मां अरपा महाआरती होगी। पचरीघाट में लोक संस्कृति, भोजली परंपरा और मां अरपा की आरती का यह संगम आयोजन को और भी विशेष बनाएगा।

आयोजकों ने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि संस्कृति, आस्था, भाईचारे और सामुदायिक परंपरा का प्रतीक है। बदलते दौर में लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से भोजली महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
मां बिलासा लोक संस्कृति एवं कला मंच ने शहरवासियों से अपील की है कि वे 29 अगस्त को परिवार सहित पचरीघाट पहुंचकर भोजली महोत्सव में शामिल हों और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति एवं गौरवशाली परंपरा के इस उत्सव का हिस्सा बनें।

