सत्यम चौक से निकला 47 साल पुरानी परंपरा का मुख्य जुलूस शहर भर में जगह-जगह हुआ इस्तकबाल इमामों की गुलपोशी के साथ बांटी गई शिरनी मिठाई…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की विलादत की खुशी में बुधवार को बिलासपुर में ईद-ए-मिलादुन्नबी का पर्व धार्मिक उल्लास, उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में कई दिनों से चल रही तैयारियों के बाद सत्यम चौक से परंपरागत मुख्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बच्चों से लेकर बुजुर्गों और समाज के प्रमुख लोगों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर विभिन्न मुस्लिम कमेटियों ने जुलूस का इस्तकबाल किया। कहीं इमामों और बुजुर्गों की गुलपोशी की गई तो कहीं जुलूस में शामिल लोगों को पानी, मिठाई, शिरनी, बिस्कुट और चॉकलेट वितरित की गई।
ईद मिलादुन्नबी के 1501वें वर्ष के अवसर पर निकला यह जुलूस बिलासपुर की करीब 47 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा। इमाम-खतीब की कयादत में मुख्य जुलूस सत्यम चौक से रवाना होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए ईदगाह पहुंचा। पूरे आयोजन में अमन, इंसानियत, कौमी एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया।
11 दिनों से बच्चों के जुलूसों ने बढ़ाई पर्व की रौनक:-
मुख्य जुलूस से पहले ही शहर में ईद मिलादुन्नबी की रौनक देखने को मिल रही थी। पिछले 11 दिनों से अलग-अलग मुस्लिम बहुल इलाकों में बच्चों के जुलूस निकाले जा रहे थे। तालापारा, राजेंद्र नगर, मसनगंज, खपरगंज सहित कई इलाकों में बच्चों की भागीदारी ने पर्व के उत्साह को और बढ़ा दिया।
शहर के कई मोहल्लों में घरों और प्रतिष्ठानों को आकर्षक रोशनी, धार्मिक झंडों और सजावटी सामान से सजाया गया था। रात होते ही रोशनी से जगमगाते मोहल्ले ईद मिलादुन्नबी की खुशी का एहसास करा रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया।
सुबह निकला बाइक जुलूस, प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार सुबह 8.30 बजे जूनी लाइन से बाइक जुलूस निकाला गया। जुलूस खपरगंज, मध्य नगरी, मसानगंज, अग्रसेन चौक, खामोशगंज कब्रिस्तान, मरिमाई, भारत चौक, श्रीकांत वर्मा मार्ग, लिंक रोड, तारबाहर, गिरजा चौक, रेलवे ऑटो स्टैंड, बुधवारी बाजार, गुरु नानक चौक, गांधी चौक, गोल बाजार, करोना चौक, देवकीनंदन चौक, राजेंद्र नगर, मंदिर चौक, महाराणा प्रताप चौक, भारती नगर चौक, तैयबा चौक और मगरपारा चौक होते हुए दोपहर करीब 1 बजे जूनी लाइन में समाप्त हुआ।
सत्यम चौक से रवाना हुआ मुख्य जुलूस
मुख्य जुलूस दोपहर करीब 2.30 बजे सत्यम चौक से इमाम-खतीब की कयादत में रवाना हुआ। यहां से जुलूस लिंक रोड, तारबाहर चौक, पुराना हाईकोर्ट, गांधी चौक और जूना बिलासपुर होते हुए गोल बाजार पहुंचा, जहां नमाज-ए-असर अदा की गई।
इसके बाद जुलूस जूनी लाइन चौक, कंपनी गार्डन चौक, राजेंद्र नगर और सिविल लाइन थाना के सामने से होते हुए ईदगाह पहुंचा। यहां परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। इसके बाद नमाज-ए-मगरिब हुई। नमाज के बाद पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं पर तकरीर की गई। फातिहा तथा दरूद-ओ-सलाम के साथ जुलूस का समापन हुआ।
सत्यम चौक पर जावेद मेमन ने किया भव्य इस्तकबाल:-
मुख्य जुलूस के दौरान सत्यम चौक पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं समाजसेवी जावेद मेमन की अगुवाई में जुलूस का भव्य इस्तकबाल किया गया। उन्होंने मस्जिदों के इमामों और समाज के बुजुर्गों की गुलपोशी कर स्वागत किया। जुलूस में शामिल बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों को पानी, मिठाई, बिस्कुट और चॉकलेट वितरित किए गए।
जावेद मेमन ने कहा कि बिलासपुर की पहचान वर्षों से सौहार्दपूर्ण वातावरण और भाईचारे की परंपरा के लिए रही है। ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पैगंबर साहब ने पूरी मानवता को शांति, प्रेम, इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया, जिसे आज के दौर में और मजबूती से समाज तक पहुंचाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से मानवता, प्रेम, शांति और सामाजिक एकता का संदेश भी समाज तक पहुंचना चाहिए।
सत्यम चौक पर हुए स्वागत कार्यक्रम में विनय वैद्य, अयाज खान, रिजवान खान, रवि गेडाम, वकार खान, नदीम खान, कैफ मेमन, कैफ खान, अरशद खान और शिव यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
देवकीनंदन चौक पर स्पीन शाह दरगाह कमेटी ने किया इस्तकबाल:-
देवकीनंदन चौक पर स्पीन शाह दरगाह कमेटी की ओर से जुलूस में शामिल लोगों के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। कमेटी के सदस्यों ने जुलूस का इस्तकबाल करते हुए शिरनी और मिठाई वितरित की।
कमेटी के सक्रिय सदस्य जफर आग़ा के नेतृत्व में सैयद ज़फ़र, सैयद याकूब, सैयद ज़ाहिद, सैयद समद, खुर्शीद अहमद, शकील क़ादरी, जुनैद रज़ा, सलीम मेमन, इमरान ख़ान, साजिद चौहान, हाजी साहबू, आमिर रज़ा, टीपू बख्श और बंटी बख्श सहित अन्य साथियों ने जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया।

चौक-चौराहों पर हुआ इस्तकबाल, बंटा पानी-मिठाई शहरभर में जुलूस के स्वागत के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की गई थी। विभिन्न मुस्लिम कमेटियों ने चौक-चौराहों पर जुलूस का इस्तकबाल किया। कहीं पानी की व्यवस्था की गई तो कहीं शिरनी, मिठाई, बिस्कुट और चॉकलेट बांटे गए। स्वागत के इन आयोजनों ने पूरे शहर में पर्व की खुशी के साथ आपसी भाईचारे और सद्भाव का माहौल बनाया।
पैगंबर साहब की शिक्षाओं को याद कर दिया अमन का संदेश:-
ईद मिलादुन्नबी के आयोजनों में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं को याद किया गया। वक्ताओं ने प्रेम, इंसानियत, शांति, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को समाज की मजबूती का आधार बताया। आयोजकों ने कहा कि मौजूदा दौर में मानवता और शांति का संदेश समाज तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
जुलूस में डीजे, पावर जोन और अस्त्र-शस्त्र पर रहा प्रतिबंध:-
मुख्य जुलूस को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने के लिए प्रशासन की गाइडलाइन का पालन किया गया। जुलूस में डीजे, पावर जोन, ऑटो, ई-रिक्शा तथा अस्त्र-शस्त्र प्रतिबंधित रखे गए। आयोजकों ने भी धार्मिक मर्यादा और अनुशासन के साथ जुलूस निकालने पर जोर दिया। आतिशबाजी को लेकर भी प्रशासनिक निर्देशों का पालन किया गया।
47 साल पुरानी परंपरा ने फिर दिया भाईचारे का संदेश:-
बिलासपुर में ईद मिलादुन्नबी का मुख्य जुलूस लगातार 47 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इस बार 1501वें वर्ष के अवसर पर निकले जुलूस में शहर की पुरानी धार्मिक-सामाजिक परंपरा के साथ नई पीढ़ी की भागीदारी भी दिखाई दी। बच्चों के 11 दिनों से निकले जुलूसों से लेकर मुख्य जुलूस तक पूरे शहर में मिलाद की रौनक बनी रही।
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर बिलासपुर ने एक बार फिर धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक सौहार्द और कौमी एकता की तस्वीर पेश की। जगह-जगह हुए इस्तकबाल, गुलपोशी और पानी-मिठाई वितरण के बीच शहर से अमन, इंसानियत और भाईचारे का संदेश गूंजता रहा।

