सिंधी समाज की महिलाओं ने श्रद्धा और उमंग से मनाया पारंपरिक ट्रीजड़ी तीज पर्व, सामूहिक पूजन व कथा के बाद चांद को अर्घ्य देकर खोला व्रत…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
बिलासपुर सिंधी समाज की महिलाओं ने सोमवार को अपनी समृद्ध धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा का प्रतीक ट्रीजड़ी (तीज) पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया। शनिचरी पड़ाव स्थित भाई वरियाराम गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं एकत्रित हुईं और विधि-विधान से ट्रीजड़ी माता की पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सुहाग की मंगलकामना की।
ट्रीजड़ी पर्व सिंधी समाज की उन पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, जिसमें सुहागिन महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करती हैं। पर्व के अवसर पर महिलाएं सुबह स्नान आदि के बाद सज-धजकर पूजा की तैयारियों में जुटीं। भोर में शगुन के रूप में हल्का भोजन ग्रहण करने के बाद महिलाओं ने उपवास प्रारंभ किया।

सात प्रकार के अनाज से तैयार की जाती है ट्रीजड़ी-:
समाज की श्रीमती सरिता डोडवानी ने बताया कि ट्रीजड़ी पर्व की तैयारी एकादशी से ही शुरू हो जाती है। एक पात्र अथवा बर्तन में मिट्टी भरकर उसमें सात प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। कुछ दिनों बाद तैयार होने वाली यह सतधान्य भोजली ट्रीजड़ी पर्व की पूजा में विशेष महत्व रखती है।
ट्रीजड़ी के दिन महिलाएं इसी सतधान्य को पूजा में शामिल कर फल, फूल और जल अर्पित करती हैं। भाई वरियाराम गुरुद्वारे में विशेष रूप से झूले की व्यवस्था की गई, जहां महिलाओं ने ट्रीजड़ी माता को झूला झुलाकर श्रद्धा-भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती से पति की दीर्घायु, परिवार में सुख-शांति, समृद्धि तथा सभी सदस्यों के स्वस्थ और निरोगी रहने की प्रार्थना की गई।

सामूहिक कथा और चांद को अर्घ्य देकर हुआ व्रत का पारण-:
पर्व के दौरान शाम को महिलाओं ने सामूहिक रूप से ट्रीजड़ी माता की कथा का श्रवण किया। धार्मिक वातावरण में पूजा-पाठ और कथा के बीच महिलाओं ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया। रात्रि में चांद देवता के दर्शन के बाद दूध में चावल डालकर एवं जल अर्पित करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दिया गया और इसके पश्चात महिलाओं ने विधि-विधान से अपने व्रत का पारण किया।
कुंवारी कन्याओं ने भी रखा उपवास
ट्रीजड़ी पर्व की विशेषता यह भी रही कि समाज की कुंवारी कन्याओं ने भी उत्साहपूर्वक उपवास रखा। उन्होंने मनवांछित वर एवं सुखी वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करते हुए ट्रीजड़ी माता की पूजा की। इस अवसर पर नई पीढ़ी की बेटियों की भागीदारी ने सिंधी समाज की पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
भाई वरियाराम गुरुद्वारे में आयोजित पूजा-अर्चना गुरुद्वारा प्रबंधक श्रीमती कोमल वाधवानी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। पूरे आयोजन में महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सामूहिक रूप से पर्व मनाने से गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

इस अवसर पर सरिता डोडवानी, गीता भाटिया, रेखा राज, प्रिया, निशि पमनानी, आयुषी, कोमल वाधवानी, वर्षा वाधवानी, कविता डोडवानी, निकिता डोडवानी, दीपा रामानी, अनसूईया ठारवानी, कंचन ठारवानी, अनीता भोजवानी, गीता भोजवानी, एकता डोडवानी, उषा चंदनानी, नैना मलघानी, पलक डोडवानी, आरती आहूजा, अंजलि नागदेव, लता हरदवानी, मधु हिंदूजा, ज्योति हरियानी, माही डोडवानी, पूजा डोडवानी, दिव्या चावला, रेशमा मेहानी, प्रिया जगवानी, मंजू मोहनानी, मुस्कान आहूजा, कविता खुशालानी, प्रेरणा नत्थानी, रोशनी साधवानी, मीरा हरजानी, अंशिका वाधवानी, खुशी हरजानी, आशा चावला, कांता वासवानी, कशिश हरजानी, शिखा हरजानी, मोनिका नत्थानी, दिशा डोडवानी, पूजा लधानी, वंशिका भोजवानी, नेहा आहूजा, जया मलघानी, सपना टेकचंदानी, भूमिका बत्रा, प्रिया आडवानी, पलक सिदारा, कुसुम गोदवानी, कीर्ति मलघानी, किरन चावला, बबीता आडवानी, माही आडवानी, कोमल चावला, स्वाति चावला, किरन नरसिंगनी सहित बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं उपस्थित रहीं।

ट्रीजड़ी पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सिंधी समाज अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी सदियों पुरानी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ संजोकर रखे हुए है।

