एलिसा जांच में भी सामने आए संक्रमण के मामले…समय पर जांच सही निदान सिम्स ने की अपील…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में वायरल हेपेटाइटिस की जांच के दौरान संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने अगस्त 2026 में हेपेटाइटिस बी और सी की रैपिड स्क्रीनिंग सहित विभिन्न जांचें कीं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस बी की रैपिड जांच में 2,087 और हेपेटाइटिस सी की जांच में 2,083 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस तरह दोनों श्रेणियों में कुल 4,170 जांचें हुईं। इसके अलावा हेपेटाइटिस ए के 57 और हेपेटाइटिस ई के 52 लोगों की जांच की गई।
रैपिड जांच में बी के 48, सी के 19 मामले पॉजिटिव विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी की रैपिड जांच में 48 और हेपेटाइटिस सी की रैपिड जांच में 19 लोग पॉजिटिव पाए गए। आगे की जांच में हेपेटाइटिस बी की एलिसा जांच में 77 में से 63 और हेपेटाइटिस सी की एलिसा जांच में 38 में से 30 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव रही। वहीं, हेपेटाइटिस बी की वायरल लोड जांच में 42 में से 25 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। हेपेटाइटिस सी की वायरल लोड जांच में 12 लोगों में कोई पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ।
हेपेटाइटिस ए की जांच में एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया, जबकि हेपेटाइटिस ई की जांच में कोई पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया। ये आंकड़े अलग-अलग जांच प्रक्रियाओं से संबंधित हैं। इसलिए इन्हें अलग-अलग संक्रमित व्यक्तियों की कुल संख्या नहीं माना जा सकता।
शुरुआती संक्रमण में लक्षण नहीं, जांच जरूरी
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए समय पर जांच, सही निदान और वैज्ञानिक उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं। हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण कई बार शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षणों के बिना भी रह सकते हैं। ऐसे में जांच के जरिए संक्रमण की पहचान करना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की जांच कराना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि एलिसा और वायरल लोड जैसी जांचें संक्रमण की स्थिति का आकलन करने तथा उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद करती हैं। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण प्रभावी उपाय है, जबकि हेपेटाइटिस सी का उपचार उपलब्ध दवाओं से संभव है। लोगों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।
सुरक्षित रक्त और स्टरलाइज्ड सुई का इस्तेमाल जरूरी माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा बारापात्रे ने बताया कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए संक्रमण के प्रकार के अनुसार स्वच्छता और सुरक्षा संबंधी उपाय अपनाना आवश्यक है। स्वच्छ पानी, सुरक्षित भोजन और हाथों की सफाई हेपेटाइटिस ए और ई से बचाव में महत्वपूर्ण हैं। वहीं, हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षित रक्त, स्टरलाइज्ड सुई और सुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।
उन्होंने लोगों से हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण कराने तथा जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की। सिम्स में संचालित यह कार्यक्रम संक्रमण की पहचान मरीजों को उपचार से जोड़ने और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

