बिलासपुर प्रेस क्लब ने खोला मोर्चा…! शासन-प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सोशल मीडिया पर पत्रकार बनकर अपुष्ट खबरें चलाने और विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों पर कार्रवाई की मांग…! पत्रकारिता के लिए 5 साल का अनुभव अनिवार्य करने का भी उठा मुद्दा…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर सक्रिय कुछ कथित लोगों की कार्यप्रणाली और विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर खुद को पत्रकार बताकर अपुष्ट एवं भ्रामक वीडियो प्रसारित करने तथा समाचार प्रकाशन और विज्ञापन के नाम पर अनुचित दबाव बनाने की शिकायतों को लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने अब संस्थागत पहल की है। प्रेस क्लब ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर बिलासपुर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पारदर्शी व्यवस्था बनाने और निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस क्लब ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति अथवा संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार पत्रकारिता, प्रशासनिक व्यवस्था, जनविश्वास और डिजिटल माध्यमों से प्रसारित होने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर समाचार प्रसारित करने के नाम पर कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर बिना पुष्टि के वीडियो और सामग्री प्रसारित किए जाने तथा विज्ञापन दिलाने या समाचार प्रकाशित करने के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसी गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी जांच नहीं हुई तो इसका सीधा असर वास्तविक पत्रकारों और प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों की साख पर पड़ सकता है।
छह सूत्रीय मांगों के जरिए व्यवस्था में पारदर्शिता की पहल-:

बिलासपुर प्रेस क्लब ने शासन-प्रशासन के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाचार प्रसारित करने वालों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना, सरकारी विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट करने तथा शिकायत निवारण की पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना शामिल है।
इसके अलावा विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली के मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम एजेंसियों से जांच कराने, भ्रामक और अपुष्ट सामग्री प्रसारित करने वालों के विरुद्ध लागू कानूनों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
प्रेस क्लब ने यह भी कहा है कि कार्रवाई के नाम पर वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, समाचार संस्थानों और आम नागरिकों के वैध अभिव्यक्ति के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ जिम्मेदार पत्रकारिता को संरक्षण मिलना भी जरूरी है।
पोर्टल पत्रकारिता के लिए 5 साल का अनुभव अनिवार्य करने का सुझाव-:
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा सोशल मीडिया और डिजिटल पोर्टल के तेजी से बढ़ते दायरे का भी उठाया गया है। प्रेस क्लब का सुझाव है कि केंद्र और राज्य सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचार पोर्टल संचालित करने तथा पत्रकारिता के नाम पर काम करने वालों के लिए स्पष्ट पात्रता और अनुभव संबंधी दिशा-निर्देश तय करें।
इसके तहत डिजिटल पत्रकारिता से जुड़ने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान में न्यूनतम पांच वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने वाली संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों की भी गहन जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाने के लिए अब स्पष्ट नीति जरूरी-:

प्रेस क्लब का मानना है कि पत्रकारिता केवल सोशल मीडिया अकाउंट, कैमरा या माइक लेकर वीडियो प्रसारित करने तक सीमित नहीं है। इसके साथ तथ्यपरकता, जवाबदेही, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। ऐसे में डिजिटल पत्रकारिता के नाम पर कथित रूप से दबाव बनाने, अपुष्ट खबरें प्रसारित करने और विज्ञापन के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाता है और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा शिकायतों के निष्पक्ष निराकरण के लिए राज्य स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था कब तक विकसित होती है।

