हिंदुओं के सभी त्यौहारों में प्रकृति का नुक़सान बता कर हिंदुओं में उनके धर्म , संस्कृति और परम्परा के प्रति हीनभावना पैदा करने किया जा रहा प्रयास
03- नवंबर 2021
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
हिंदुओं के सभी त्यौहारों में प्रकृति के नुक़सान बता कर हिंदुओं में उनके धर्म , संस्कृति और परम्परा के प्रति हीन भावना पैदा करने किया जा रहा प्रयास
और हमारे पढ़े लिखे भोले हिंदू उनकी बातों में आ के अपनी संस्कृति और परम्परा से दूर हो जाते है।
पर सभी त्योहारों में कमी इसलिए निकाली जाती है कि हिंदू संगठित न हो सके । क्यूँकि भारत उत्सवों का देश है हम सामूहिक रूप से उत्सव मानते है और ये उत्सव हमें एकात्मता के सूत्र में बांधते है।
भारत के विभिन्न पंथ प्रांत सम्प्रदाय भाषा इन्ही उत्सवों के माध्यम से एक होती है सभी उत्सव विभिन्न राज्यों में विभिन्न नामों से मनाए जाते है और विभिन्नता में एकता के दर्शन होते है, इन त्योहारों में जात-पात,
ऊँच-नीच और अमीर-गरीब ये सब भेद मिट जाते है दीपावली, होली, कवाड यात्रा,दुर्गा उत्सव,गणेश उत्सव शिवरात्रि, मकर संक्रान्ति यदि सभी त्योहारों में ये सभी भेद मिट जाते है। इस समय कोई किसी से जात-पात ,ऊँच-नींच , राज्य व भाषा की बात नहीं करता और हिंदू समाज बिखरने नहीं पाता और हिंदू संगठित होते जाता है
हिंदू संगठित रहेंगे तो कई देशों, लोगों,समुदायों व राजनेताओ की दुकान बंद हो जाएगी। इसलिये कई प्रकार बातें कर, विभिन्न नियम क़ानून बनाकर इन उत्सवों में लोगों की भागीदारी कम की जाती है और हिंदू संगठित न हो पाए ऐसे प्रयास किये जाते है।
इन सब बातों को लागू कराने में कई हिंदू धर्म को मानने वाले अधिकारी ,नेता और अन्य लोग भी लगे रहते उन्हें पता ही नहीं रहता कि वे कैसा इतिहास रच रहे है जैसे जालियावाला बाग घटना में ऑर्डर करने वाला जनरल डायर अंग्रेज था पर गोली चलाने वाले सभी सिपाही भारतीय थे उस दिन कोई एक सिपाही आदेश के बाद एक गोली जनरल डायर को मार देता तो उसका नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरो में दर्ज हो जाता।
इसी तरह आज भी कई भारतीय सनातनी राष्ट्रविरोधी व धर्म विरोधी काम करते है सिर्फ़ धन और नौकरी में तरक़्क़ी की लालच के कारण अक्षम्य पाप करते है
जैसे अतीत में हमारी धर्म संस्कृति को नष्ट करने के लिये मंदिरो और हमारी आस्था के स्थानो को नष्ट किया गया ।हमारे ज्ञान और विज्ञान के संस्थानो नालंदा , तक्षशिला को नष्ट किया गया।
उसी तरह आज पर्यावरण और प्रकृति का नाम ले कर सूक्ष्म रूप से धर्म संस्कृति और परम्परा को नष्ट किया जा रहा है तो क्या अतीत की तरह आज भी चुप रहेंगे ?
नहीं अब ऐसा नहीं होने देना है उनके छल कपट को ,राष्ट्रविरोधियों
और घर के भेदियों की पहचान कर उनका विरोध करना है।
ये लोग अभी तो सिर्फ़ ईको फ़्रेंड्ली की बात कर रहे है हम सनातन हिंदू धर्म वाले आदिकाल से ईको फ़ैमिली में रहते आ रहे है धरतीमाता , गंगामैया गौंमाता
हमने हमेशा प्रकृति का ध्यान रखा हमारे यहाँ ओर्गानिक खेती होती थी आधुनिकीकरण की दौड़ में हमारे नेता आज़ादी के बाद पश्चिम का अंधानुकरण करने लगे और अपनी
पुरानी परम्परा से दूर हुए।
पर आज हम दीवाली अच्छे से मनाएँगे और प्रदूषण कम करने के लिए साल में दस दिन अपनी गाड़ी नहीं चलाएँगे
होली में एक बाल्टी रंग खेलेंगे और साल में दस बाल्टी पानी बचाएँगे
मकर संक्रांति में पतंग उड़ाएँगे और शाकाहार अपना कर पशु पक्षियों की रक्षा करेंगे।
इस तरह हम सभी त्योहारों को ज़ोरदार मनाएँगे और सालभर पर्यावरण संरक्षण भी करेंगे। अभी सनातन हिंदू धर्म की रक्षा करना न सिर्फ़ देश के लिए वरन पूरे विश्व के लिये ज़रूरी है इस कठिन समय में सिर्फ़ सनातन हिंदू धर्म ही पूरे विश्व में एकात्मता व विश्व बंधुत्व के सूत्र में बाँध सकती और धरतीमाता की रक्षा कर सकती है,
पूरा विश्व हमारी तरफ़ देख रहा है,
विश्व कल्याण के लिए हमें एक होना होगा।अपनी छोटी छोटी लालच से ऊपर उठना होगा।




