सदन की अव्यवस्था पर भड़के महापौर के तीखे तेवर से स्तंभ सभापति…!
29 मार्च 20243
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] नगर निगम की सामान्य सभा में आज जमकर हंगामा रहा। कभी किसी सदस्य ने दूसरे सदस्य को पागल कह दिया तो हंगामा हो गया, कभी आयुक्त के बयान पर विपक्षी पार्षद हंगामा करते हुए धरने पर बैठ गए, इधर कई पार्षद सदन में महापौर या MIC सदस्य से सवाल पूछने के बजाए सीधे अधिकारियों से सवाल करते रहे। विडंबना तो ये रहा सभापति सदस्यों को सीधे अधिकारियों से सवाल करने की अनुमति भी देते रहे। जब सदन की अव्यवस्था बर्दास्त के बाहर होने लगी तो महापौर राम शरण यादव सभापति शेख नजीरुद्दीन पर भड़क गए। कहा जब अधिकारियों को ही जवाब देना है तो सामान्य सभा क्यों बुलाई गई है… मैं ही बाहर चला जाता हूं…। महापौर का तेवर देखकर कुछ देर के लिए सभापति भी सकते में आ गए और सदन 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
बुधवार को नगर निगम के सामान्य सभा की शुरुआत हंगामे के साथ शुरू हुआ। सामान्य सभा शुरू होने से पहले सभापति ने उपस्थित सभी पार्षदों को संबोधित किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष अशोक विधानी, उपनेता प्रतिपक्ष राजेश सिंह और महापौर ने सभी को संबोधित किया। 12:40 पर सामान्य सभा का प्रश्नकाल शुरू हुआ।
निष्कासित कर दिया जाएगा। इसके बाद फिर से सदन का प्रश्नकाल शुरू हुआ। लेकिन भाजपा पार्षदों ने बीच-बीच में सवाल दागना शुरू कर दिया। इस बीच भाजपा के पार्षद सीधे अधिकारियों से सवाल पूछने लगे और सभापति अधिकारियों को जवाब देने के निर्देश देने लगे। महापौर राम शरण यादव चुपचाप देखते रहे। एक दो सवाल होने के बाद वो सभापति पर ही जमकर भड़क गए। सदन में हो रहे हंगामा, पार्षदों को सीधे अधिकारियों से सवाल पूछने की अनुमति देना और पार्षदों से ज्यादा और लगातार सभापति का ही बोलते रहना महापौर को बर्दास्त नहीं हुआ और वो सभापति पर भड़क गए, कहा- सदन को सदन की तरह चलाएं।
पार्षदों के सवाल का जवाब कौन देगा यह कौन तय करेगा ? जब अधिकारियों को ही जवाब देना है तो सामान्यसभा बुलाने का कोई मतलब नहीं है, मैं भी सदन से बाहर चला जाता हूं। महापौर का तेवर देखकर कुछ देर के लिए शेख नजीरुद्दीन भी हक्के बक्के रह गए। कुछ देर असहज महसूस करने के बाद हंगामे के बीच 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित कर दिया। जब दुबारा सदन शुरू हुआ तो छिटपुट हंगामे के बीच प्रश्नकाल चलता रहा और पार्षदों के सवाल का जवाब कभी महापौर तो कभी MIC सदस्य देते रहे। इस बीच भाजपा के पार्षदों ने आयुक्त द्वारा की गई अशोभनीय टिप्पणी पर भड़क गए और उनसे माफी मांगने के लिए दबाव बनाया। यही नहीं भाजपा के पार्षद तीसरी बार धरने पर बैठ गए। लेकिन लंच के बाद सभापति और महापौर की समझाइश पर वे सदन में सवाल जवाब के लिए तैयार हो गए।


