आयुक्त के प्लान को किया मटियामेट
बेजा कब्जे पर रसूखदारों पर मेहरबानी समझ से परे…!
16 मई 2023
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] उसलापुर में बेजा कब्जा हटाकर निगम आयुक्त कुणाल दुदावत ने खूब वाहवाही बटोरी थी। शहर वालों को भरोसा हो गया था की अब रसूखदारों का भी बेजा कब्जा हट सकता है। लेकिन उनके छुट्टी में जाते ही मातहत अधिकारियों ने उनके द्वारा चलाये गए अभियान की मटिया मेट कर दिया है। आठ से अधिक रसूखदारों को अभयदान दे दिया गया है। वे जिस सरकारी जमीन में काबिज थे अब बने रहेंगे…! लेकिन इस अभयदान को लेकर उंगली उठने लगी है। शहर में चर्चा है निगम का अमला मजबूर होकर रसूखदारों को छोड़ा या फिर किसी राजनीनिक आदेश से फलीभूत ये हिस्सा बटवारा हुआ..!
ज्ञात हो कि राजेंद्र सिंघानिया 308 वर्गफिट सरकारी जमीन में अभी भी काबिज है। उसने एक हजार वर्गफिट जमीन में गार्डन और मकान बनाकर कब्जा किया था जिसमे से 692 वर्गफीट कब्जा हटाया गया था। डीडी बजाज 475 वर्गफिट जमीन में कब्जा करके मकान और गार्डन बनाया था जिसमे से 325 वर्गफिट कब्जा हटाया गया था लेकिन अभी 150 वर्गफिट में काबिज हैं। संतोष सिंघानिया का 575 वर्गफिट जमीन पर कब्जा था जिसमे से 404 वर्गफिर कब्जा हटाया गया है लेकिन 145 वर्गफिट सरकारी जमीन में अभी भी काबिज है। कबीर चड्ढा 442 वर्गफिट सरकारी जमीन में काबिज थे जिसमे से 279 वर्गफिट कब्जा हटाया गया था। 144 वर्गफिट जमीन पर वो अभी भी काबिज है। आसमा बिल्डर का 260 वर्गफिट जमीन में काबिज था 201 वर्गफिट कब्जा हटाया गया लेकिन 58 वर्गफिट जमीन में अभी भी काबिज है। आशुतोष पाठक 45 वर्गफिट में बेजा कब्जा किया था लेकिन केवल 23 वर्गफीट हटाया गया। इसी तरह पाटीदार भवन 810 वर्गफिट सरकारी जमीन पर कब्जा किया था 513 वर्गफिट से कब्जा हटाया गया लेकिन गुजराती समाज अभी भी 297 वर्ग फिट जमीन को दाबी कर बैठा है।
कुल जमा खर्च से ये साबित हुआ कि निगम की कार्रवाई संदेह के दायरे में आ चुकी है निगम आयुक्त कुणाल दुदावत का नाम बदनाम हो रहा है। शहर में कई तरह की चर्चा हो रही है। हालांकि वे शादी करने के लिए छुट्टी पर चले गए है। अब देखना होगा कि छुट्टी से वापस लौटने पर बेजा कब्जा को हटाने को लेकर उनका क्या रुख रहता है ,और फिर क्या नए समीकरण बनते है।

