कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के बिगड़े बोल…! विधायक की कुर्सी पर लटकी निष्कासन की तलवार…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} छत्तीसगढ़ कांग्रेस में आंतरिक कलह अब चरम पर है। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के विवादित बयानों और अनुशासनहीनता को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर एवं ग्रामीण) ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंहदेव की मौजूदगी में हुई इस घटना ने पार्टी में भूचाल ला दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी इस कदर है कि अब विधायक के निष्कासन की अनुशंसा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को भेजी गई है।
विधायक के बिगड़े बोल, कार्यकर्ताओं में आक्रोश
मिली जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को हुई बैठक में विधायक अटल श्रीवास्तव ने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपमानित करते हुए कहा, “तुम्हारा मेरे लिए कोई उपयोग नहीं है।” इस बयान से पार्टी के अंदर असंतोष फैल गया। इतना ही नहीं, उन्होंने जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय पांडेय और विजय केसरवानी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, “चपरासी अब कलेक्टर को निष्कासित करने चला है।”
पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोप…
विधायक पर यह भी आरोप है कि उन्होंने मीडिया में पार्टी विरोधी बयानबाजी की और स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ प्रचार किया। यह सीधे तौर पर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन माना जा रहा है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी ने कहा, “अटल श्रीवास्तव का व्यवहार संगठन की एकता को नुकसान पहुंचा रहा है। उनकी बयानबाजी से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। ऐसे अनुशासनहीन नेता को कांग्रेस में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए।”
हाईकमान तक पहुंचा मामला, विधायक की कुर्सी पर बजी खतरे की घंटी…
जिला कांग्रेस कमेटी ने अटल श्रीवास्तव के खिलाफ लिखित शिकायत PCC को भेजी है, जिसकी प्रतियां कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और मीडिया को भी सौंपी गई हैं। इससे मामला और गरमा गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस कमेटी और हाईकमान ने इस विवाद पर संज्ञान ले लिया है। जल्द ही कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। अगर निष्कासन की सिफारिश पर मुहर लगती है, तो अटल श्रीवास्तव की विधायक पद की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है।
कांग्रेस में कलह से विपक्ष को बैठे-बिठाए फायदा?
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ते विवादों से भाजपा और अन्य विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। अगर पार्टी जल्द निर्णय नहीं लेती, तो यह विवाद कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस हाईकमान अनुशासन के नाम पर कड़ा फैसला लेती है या अंदरूनी राजनीति के चलते मामले को दबाने की कोशिश होती है।
फिलहाल, सबकी नजरें कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं।



