सम्प्रभुता’ की जगह ‘साम्प्रदायिकता’ अक्षुण्ण रखने की ले ली शपथ… समारोह में लगे ठहाके…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़} नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर और पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में ऐसा हास्यास्पद दृश्य देखने को मिला, जिसकी गूंज शहरभर में सुनाई देने लगी। महापौर एल. पद्मजा ने शपथ लेते समय ऐसा भारी भरकम ‘फिसलन भरा’ शब्द फेंक दिया कि पूरा समारोह ठहाकों से गूंज उठा। उन्होंने ‘सम्प्रभुता’ को अक्षुण्ण रखने की जगह ‘साम्प्रदायिकता’ को अक्षुण्ण रखने की शपथ ले ली!

सीधा मंच से हुई महापौर की किरकिरी
शुक्रवार को मुंगेली नाका चौक मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में पहले से ही अव्यवस्था का बोलबाला था। पार्षदों की शपथ के दौरान उच्चारण की गलतियों पर लोग पहले ही हंस रहे थे, लेकिन महापौर की ‘ऐतिहासिक चूक’ ने तो सबको पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर दिया। मंच पर मौजूद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल और सुशांत शुक्ला भी यह सुनकर असहज हो गए।
दूसरी बार दिलाई गई शपथ, शर्मिंदगी से हुआ आगाज़…!
महापौर को खुद अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ, लेकिन अफसरों को जैसे ही समझ आया, वे तेजी से उनके पास पहुंचे और तुरंत दोबारा शपथ लेने को कहा। तब कहीं जाकर औपचारिकता पूरी हुई। लेकिन तब तक यह घटना मजाक का विषय बन चुकी थी।

बदइंतजामी और भाजपा नेताओं की धौंस…!
समारोह की अव्यवस्थाएं भी कम शर्मनाक नहीं थीं। समाज प्रमुखों की आरक्षित सीटों पर भाजपा नेता जमकर विराजमान थे, जबकि पत्रकार दीर्घा में पार्षदों के रिश्तेदार घुसे बैठे थे। नगर निगम को भीड़ जुटाने के लिए सफाई कर्मचारियों तक को बुलाना पड़ा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अनुपस्थिति ने कार्यक्रम को और ठंडा बना दिया।
महापौर के लिए यह पहला सार्वजनिक अवसर था, लेकिन पहले ही दिन की गई भारी चूक ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शहर को नेतृत्व देने वाली महापौर को शपथ पत्र पढ़ने तक की योग्यता नहीं? यह घटना केवल मजाक बनकर नहीं रह गई, बल्कि शहर की राजनीति में भी तीखी चर्चा का विषय बन गई है।

अब देखना यह है कि महापौर एल. पद्मजा अपने कार्यकाल को भी इसी तरह की गलतियों से भरेंगी या इस शर्मिंदगी से सबक लेंगी?

