दो लोगों के जीवन में जगाई नेत्रज्योति…!
नेत्रदान महादान हैंड्स ग्रुप की आमजन से अपील…
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर सरकंडा निवासी लक्ष्मण दास कारड़ा का बुधवार को निधन हो गया, लेकिन मरणोपरांत भी वे मानवता की एक बड़ी मिसाल बन गए। उनके नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी पहुंचने की उम्मीद जगी है।
दिवंगत कारड़ा के भाई हरगुन, संतोष, सुनील तथा पुत्र अशोक, चेतन और राहुल ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया और इसके लिए हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया। सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के अध्यक्ष अविनाश आहूजा व अन्य सदस्य, सिम्स के नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन, डॉ. अनिकेत कांबले और डॉ. राकेश मसीह की टीम के साथ उनके निवास स्थान पहुंचे और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
लक्ष्मण दास कारड़ा के इस पुण्य कार्य से दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी मिलने की संभावना है। यह प्रेरणादायी पहल समाज को यह संदेश देती है कि मृत्यु के बाद भी इंसान किसी के जीवन में उजाला बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आज भी कई नेत्रहीन लोग, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं, आंखों की रोशनी पाने के लिए नेत्रदान का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं, तो कई जिंदगियों में उजाला लाया जा सकता है।
नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
समय का महत्व: मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है।
सरल प्रक्रिया: पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 से 15 मिनट लगते हैं और चेहरे की बनावट पर कोई असर नहीं पड़ता।
कौन कर सकता है नेत्रदान: किसी भी उम्र का व्यक्ति, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसे मधुमेह (डायबिटीज) अथवा उच्च रक्तचाप (बीपी) की समस्या हो, नेत्रदान कर सकता है।
गोपनीयता: दान करने वाले और नेत्र प्राप्त करने वाले दोनों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
यदि घर में किसी की मृत्यु हो और नेत्रदान करना हो तो क्या करें तुरंत नजदीकी आई बैंक (Eye Bank) से संपर्क करें।
दिवंगत व्यक्ति की पलकें धीरे से बंद कर दें और उन पर गीली रुई रख दें।
कमरे का पंखा बंद कर दें और यदि संभव हो तो ए.सी. चालू रखें।
सिर के नीचे तकिया रखकर उसे थोड़ा ऊंचा रखें। समाजसेवियों का कहना है कि नेत्रदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। यदि हर व्यक्ति इस दिशा में संकल्प ले तो हजारों नेत्रहीन लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है।
मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी बनना है तो नेत्रदान का संकल्प जरूर लें।

