173 विद्यार्थियों ने पहना जिम्मेदारियों का सफेद कोट…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] सोमवार का वह पल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। जब सिम्स ऑडिटोरियम में बैठे 173 छात्र-छात्राओं की आंखों में वर्षों की मेहनत, संघर्ष, उम्मीद और सफलता एक साथ झलक रही थी। मंच पर रोशनी थी, सभागार तालियों से गूंज रहा था, अभिभावकों के चेहरों पर गर्व था और सफेद कोट पहने युवा डॉक्टरों के दिलों में भविष्य के सपने। अवसर था, एमबीबीएस बैच-2020 के लिए आयोजित “Graduation Ceremony 2026” का। यह केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं था। यह उन हजारों रातों का उत्सव था, जो किताबों के बीच गुजरीं। यह उन अनगिनत संघर्षों की कहानी थी, जहां कभी नींद से लड़कर पढ़ाई हुई, तो कभी अस्पतालों में मरीजों की पीड़ा देखकर संवेदनाएं और मजबूत हुईं। यह उन माता-पिता के त्याग का सम्मान था, जिन्होंने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए हर कठिनाई को मुस्कुराकर सहा।
कार्यक्रम की शुरुआत होते ही पूरा सभागार भावनात्मक वातावरण में डूब गया। मंच पर जब विद्यार्थियों के सफर का उल्लेख किया गया, तो कई छात्र-छात्राओं की आंखें नम हो गईं। कुछ वर्षों पहले जो विद्यार्थी अपने सपनों और आशंकाओं के साथ मेडिकल कॉलेज की दहलीज पर पहुंचे थे, वही आज डॉक्टर बनने की गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ समाज की सेवा के लिए तैयार खड़े थे।
कोविड महामारी का कठिन दौर भी इस बैच के जीवन का हिस्सा रहा। जब पूरी दुनिया भय और अनिश्चितता से गुजर रही थी, तब इन्हीं विद्यार्थियों ने मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ अस्पतालों के वास्तविक वातावरण को करीब से देखा। कई विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पहली बार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष को इतने करीब से महसूस किया। किसी ने मरीज की आंखों में उम्मीद देखी, तो किसी ने अपनों को खोने का दर्द। इन अनुभवों ने उन्हें केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी बनाया।
समारोह में विशेष अतिथि के रूप में दीपक श्रीवास्तव, डॉ. आरती पांडे, डॉ. राजीव रतन तिवारी, अशोक दिल्लीवार एवं डॉ. संदीप सोमवार उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज डॉक्टरों को केवल इलाज के लिए नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखता है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने के पीछे वर्षों का कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण छिपा होता है। एक चिकित्सक के हाथों में केवल स्टेथोस्कोप नहीं होता, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद, किसी मां की दुआ और किसी मरीज का विश्वास भी होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि चिकित्सा विज्ञान में ज्ञान आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है संवेदनशीलता। मरीज जब अस्पताल आता है, तब वह केवल इलाज नहीं चाहता, बल्कि भरोसा चाहता है। डॉक्टर का एक अच्छा व्यवहार, एक सांत्वना भरा शब्द और एक संवेदनशील दृष्टिकोण मरीज को नई ताकत देता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर बनने का सफर कभी समाप्त नहीं होता। हर दिन एक नई चुनौती, नया अनुभव और नई सीख लेकर आता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यही विद्यार्थी हजारों लोगों के जीवन से जुड़ेंगे और समाज के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे हमेशा विनम्रता, सेवा भावना और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं।
कार्यक्रम में डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. केशव कश्यप, डॉ. मनीष साहू, डॉ. श्रेया तोड़ी, डॉ. रेखा बारापात्रे, डॉ. ओपी राज, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. संगीता जोगी, डॉ. चंद्रहास ध्रुव, डॉ. जे.पी. स्वइन तथा डॉ. सागरिका प्रधान सहित सिम्स के अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षकगण एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
समारोह के दौरान कई भावुक क्षण भी देखने को मिले। जब विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, तब कई अभिभावकों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए। किसी किसान पिता का सपना पूरा हुआ था, तो किसी मां की वर्षों की प्रार्थनाएं रंग लाई थीं। कई छात्र-छात्राओं ने मंच से अपने शिक्षकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि सिम्स ने उन्हें केवल डॉक्टर बनना नहीं सिखाया, बल्कि इंसानियत और सेवा का महत्व भी समझाया।

पूरे कार्यक्रम में उत्साह, आत्मीयता और अपनापन साफ दिखाई दिया। सभागार में मौजूद हर व्यक्ति इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर गर्व महसूस कर रहा था। विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास था और दिलों में समाज की सेवा का संकल्प।
सिम्स की “Graduation Ceremony 2026” केवल एक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायी कहानी बन गई। यह कहानी उन सपनों की है, जो कठिनाइयों के बीच भी टूटे नहीं। यह कहानी उन युवा डॉक्टरों की है, जिन्होंने सफेद कोट पहनने के साथ मानवता की सेवा का प्रण लिया।
अब ये 173 युवा डॉक्टर केवल अपने परिवार या संस्थान की पहचान नहीं हैं, बल्कि समाज की नई उम्मीद हैं, ऐसी उम्मीद, जो बीमारियों से लड़ने के साथ लोगों के जीवन में विश्वास, संवेदना और नई रोशनी भी लेकर।

