जे.ई. अनुराग सोनी पर गंभीर आरोप…
ग्रामीणों में उबाल…
अब बड़े आंदोलन की चेतावनी…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार “सुशासन तिहार” के जरिए विकास, संवेदनशील प्रशासन और बेहतर मूलभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर से लगे ग्राम पंचायत चिचिरदा का आवास पारा पिछले 9 दिनों से घोर अंधेरे में डूबा हुआ है। गांव की हालत ऐसी हो चुकी है कि अब लोग सवाल पूछने लगे हैं—क्या यही है सरकार का तथाकथित सुशासन, जहां जनता बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी दर-दर भटकने को मजबूर हो..?

5 मई को आए आंधी-तूफान के बाद गांव की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 9 दिन बीत जाने के बाद भी न तो स्थायी सुधार हो पाया और न ही बिजली विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव की सुध लेने पहुंचा। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा।

ग्रामीणों के निशाने पर बिजली विभाग के जेई अनुराग सोनी हैं। गांव वालों का कहना है कि पिछले कई दिनों से वे हर शिकायत पर सिर्फ एक ही जवाब दे रहे हैं“कल बन जाएगा…” लेकिन वह “कल” आज तक नहीं आया। आरोप यह भी है कि बार-बार शिकायत करने पर अब सरपंच और जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर तक ब्लैकलिस्ट कर दिए गए हैं, ताकि लोग संपर्क ही न कर सकें।

बिजली बंद होने से गांव में हालात भयावह होते जा रहे हैं। भीषण गर्मी में जहां बुजुर्ग और महिलाएं बेहाल हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। सबसे बड़ी परेशानी पानी की है। बिजली नहीं होने के कारण मोटर बंद पड़े हैं और पूरा गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। रोजमर्रा की जिंदगी मानो ठहर सी गई है।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर घटिया गुणवत्ता के तार और ट्रांसफार्मर लगाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यही वजह है कि आए दिन ट्रांसफार्मर जल रहे हैं और तारों में चिंगारी व आग लगने जैसी घटनाएं हो रही हैं। बावजूद इसके विभाग आंख मूंदे बैठा है। लोगों का आरोप है कि फोन लगाने पर अधिकारी सिर्फ “हूं-हूं” कहकर बात टाल देते हैं और बाद में “पता करके बताता हूं” कहकर जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि बिजली उत्पादन करने वाले राज्य में ही अगर गांवों को अंधेरे में जीना पड़े, तो फिर विकास और सुशासन के दावों का आखिर मतलब क्या रह जाता है..?
चिचिरदा के ग्रामीण अब खुलकर आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ बिजली कटौती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो गांववासी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
चिचिरदा की यह तस्वीर केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उस बदहाल व्यवस्था की कहानी बन चुकी है, जहां जनता अंधेरे में है और जिम्मेदार अफसर बेखबर।

