सड़क हादसे में टूटा था कूल्हा आधुनिक तकनीक से बचाया प्राकृतिक जोड़…लाखों की सर्जरी आयुष्मान योजना में हुई निःशुल्क…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 28 वर्षीय युवक के प्राकृतिक कूल्हे (हिप जॉइंट) को सफलतापूर्वक बचाने में सफलता प्राप्त की है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक के कूल्हे की हड्डी (फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर) टूट गई थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों के जरिए कृत्रिम हिप रिप्लेसमेंट की नौबत टालते हुए उसके प्राकृतिक जोड़ को सुरक्षित रखा।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः हिप रिप्लेसमेंट 60 से 70 वर्ष की आयु के मरीजों में किया जाता है। इतनी कम उम्र में प्राकृतिक जोड़ को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सिम्स के डॉक्टरों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अत्याधुनिक जॉइंट प्रिजर्वेशन तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें फिबुला ग्राफ्टिंग, ऑटोलॉगस बोन मैरो एस्पिरेट और कैन्यूलेटेड कैंसिलस स्क्रू फिक्सेशन जैसी उन्नत प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया।
इस जटिल ऑपरेशन से न केवल मरीज का प्राकृतिक कूल्हा सुरक्षित रहा, बल्कि भविष्य में सामान्य और सक्रिय जीवन जीने की संभावना भी बढ़ गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होने वाली यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत सिम्स में मरीज को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई गई।
अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर ने बताया कि कम उम्र के मरीजों में कृत्रिम कूल्हा लगाने की बजाय प्राकृतिक जोड़ को बचाना सर्वोत्तम विकल्प होता है। समय पर सर्जरी, सही फ्रैक्चर रिडक्शन और मजबूत फिक्सेशन से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे फिजियोथेरेपी व नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बदौलत लगातार जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि समय पर उपचार और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से गंभीर दुर्घटनाओं में भी मरीजों के प्राकृतिक जोड़ सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

यह सफल ऑपरेशन विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। ऑपरेशन टीम में डॉ. तरुण सिंह ठाकुर, डॉ. प्रमोद जायसवाल, डॉ. रौनक चौबे सहित पीजी रेजिडेंट्स, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. श्वेता एवं उनकी टीम तथा नर्सिंग स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह उपलब्धि सिम्स बिलासपुर में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मरीजों को मिल रही उच्चस्तरीय निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।

