आईजी राम गोपाल गर्ग का स्पष्ट संदेश… गिरफ्तारी नहीं, पीड़ित की रकम वापस कराना ही असली सफलता…ACCU ने लौटाए 2.36 लाख टीम होगी सम्मानित…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर साइबर ठगी के शिकार लोगों को जल्द से जल्द उनकी गाढ़ी कमाई वापस दिलाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस ने एक सराहनीय और परिणामोन्मुख पहल शुरू की है। पुलिस महानिरीक्षक रेंज बिलासपुर राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल की मौजूदगी में साइबर थाना प्रभारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें Money Restoration और Grievance Redressal मॉड्यूल की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान आईजी राम गोपाल गर्ग ने स्पष्ट कहा कि साइबर अपराधों में केवल बैंक खाता धारकों या निचले स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब पीड़ित का ठगा गया पैसा कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके खाते में वापस पहुंचे। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के I4C और NCRP पोर्टल के मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल पर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि यदि साइबर ठगी की राशि किसी बैंक खाते में फ्रीज कर दी गई है तो बैंक और न्यायालय के समन्वय से उसे पीड़ित के खाते में वापस दिलाया जा सकता है। वहीं, यदि किसी निर्दोष व्यापारी या आम नागरिक का खाता गलती से फ्रीज हो जाता है तो Grievance Redressal Module के माध्यम से उसे बिना अनावश्यक परेशान किए डी-फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

इस दौरान बिलासपुर ACCU की उल्लेखनीय उपलब्धि भी सामने आई। टीम ने Money Restoration Module के माध्यम से साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को 2 लाख 36 हजार रुपये वापस दिलाए हैं, जबकि 60 अन्य प्रकरणों में रकम लौटाने की प्रक्रिया जारी है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए आईजी राम गोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने ACCU प्रभारी गोपाल सतपथी एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।

एसएसपी मुंगेली भोजराम पटेल ने भी हाल ही में सफलतापूर्वक की गई मनी रेस्टोरेशन प्रक्रिया को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने कई व्यवहारिक प्रश्न पूछे, जिनका समाधान करते हुए पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई ताकि रेंज के अन्य जिले भी इस मॉडल को प्रभावी रूप से लागू कर सकें। वहीं ICICI बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने बताया कि रकम वापसी के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों की आवश्यकता होती है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी अचल संपत्तियों का ब्यौरा तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि वे मुकदमे के दौरान संपत्ति बेच न सकें और भविष्य में पीड़ितों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार कोई भी व्यक्ति थाने पहुंचे तो उसे साइबर सेल और थाने के बीच भटकाया न जाए, बल्कि तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। आम नागरिकों से भी अपील की गई कि साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर अपनी राशि वापस पाने की प्रक्रिया शुरू करें।
बिलासपुर रेंज पुलिस की यह पहल न केवल साइबर अपराधियों पर प्रभावी शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पीड़ितों को वास्तविक राहत पहुंचाने वाली जनहितकारी पुलिसिंग का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

