कांग्रेस का अमर अग्रवाल पर सीधा हमला इस्तीफे की मांग से गरमाई सियासत…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] बिलासपुर की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा सियासी विस्फोट हुआ, जब कांग्रेस ने प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा विधायक अमर अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर विधानसभा में जनता की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में विधायक अमर अग्रवाल ने विधानसभा में एक भी प्रश्न नहीं पूछा, जबकि उन्होंने अपने कार्यकाल में 392 प्रश्न उठाकर बिलासपुर की समस्याओं को सदन तक पहुंचाया था।

इसी आधार पर कांग्रेस ने अमर अग्रवाल से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने और जनता से दोबारा जनादेश लेने की मांग कर दी।
प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी, नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप और उपनेता प्रतिपक्ष रामा बघेल ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक पर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 23 वर्षों तक बिलासपुर की राजनीति और 15 वर्षों तक मंत्री रहने के बावजूद शहर आज भी जलभराव, बदहाल सड़कें, पेयजल संकट, बिजली कटौती, अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है।

शैलेष पांडेय ने सवाल दागते हुए कहा, जब दूसरे विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की लड़ाई विधानसभा में लड़ रहे हैं, तब बिलासपुर की आवाज़ आखिर क्यों खामोश है…? उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से नहीं उठाना जनप्रतिनिधि की बड़ी विफलता है।
कांग्रेस ने स्मार्ट सिटी परियोजना को भी निशाने पर लिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पहली बारिश में ही पूरा शहर पानी में डूब गया। लोगों के घरों में पानी घुसा, जरूरी दस्तावेज और छात्रों की मार्कशीट तक खराब हो गईं, लेकिन सरकार केवल 6 हजार रुपये की राहत देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। कांग्रेस ने वास्तविक नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने और स्मार्ट सिटी के कार्यों, विशेषकर जतिया तालाब समेत विभिन्न परियोजनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बाढ़ और जलभराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर प्रभावित इलाकों में पहुंचे, जबकि स्थानीय विधायक जनता के बीच नजर नहीं आए। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ा रहना और उनकी आवाज़ को विधानसभा तक पहुंचाना है।
पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, ट्रेनों की निरस्ती, बिलासपुर से हवाई सेवाओं की कमी, बढ़ी बिजली दरें, निजी स्कूलों की मनमानी फीस, स्वामी आत्मानंद स्कूलों की स्थिति और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को भी सरकार की विफलता बताया। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय की एलएलबी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बिलासपुर के हक, विकास और जनता के अधिकारों के लिए है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जनहित के मुद्दों की अनदेखी जारी रही तो सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।

