समाज को दिया एक प्रेरक संदेश
उनके निर्णय से चिकित्सा शोध के लिए मेडिकल शिक्षा को मिलेगी नई दिशा…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर जीवन में समाज की सेवा करना एक बड़ा पुण्य माना जाता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी मानवता के लिए उपयोगी बनने का संकल्प विरले लोग ही लेते हैं। बिलासपुर के तेलीपारा स्थित सरजू बगीचा निवासी दिलीप हरजानी ने ऐसा ही प्रेरणादायी निर्णय लेते हुए मृत्यु उपरांत अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए दान करने का संकल्प लिया है।
इस उद्देश्य से उन्होंने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर के शरीर रचना (एनाटॉमी) विभाग में विधिवत मृत्यु उपरांत देहदान का घोषणा-पत्र जमा कर अपनी सहमति दर्ज कराई है। उनके इस निर्णय के अनुसार निधन के बाद उनका शरीर मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन, प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान में उपयोग किया जाएगा, जिससे भविष्य के चिकित्सकों को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
इस प्रेरणादायी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिलीप हरजानी के इस निर्णय को उनके परिवार का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त है। परिजनों की सहमति के साथ लिया गया यह संकल्प न केवल उनकी मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है, बल्कि समाज के प्रति उनकी गहरी जिम्मेदारी का भी परिचायक है।
देहदान को चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। मेडिकल विद्यार्थियों के लिए मानव शरीर का अध्ययन गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का आधार होता है, ऐसे में देहदान करने वाले लोग आने वाली पीढ़ियों के डॉक्टरों को तैयार करने में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिलीप हरजानी का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है कि इंसान का जीवन भले ही एक दिन समाप्त हो जाए, लेकिन उसके द्वारा किया गया सेवा का कार्य लंबे समय तक लोगों के जीवन को दिशा देता रहता है।

उनका यह संकल्प न केवल देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि अधिक से अधिक लोगों को मानव सेवा के इस महान कार्य से जुड़ने के लिए भी प्रेरित करेगा।
सच मायनों में, मृत्यु के बाद भी किसी के काम आना मानवता की सर्वोच्च मिसाल है, और दिलीप हरजानी का यह संकल्प उसी महान सोच का जीवंत उदाहरण है।

