स्वामी परमानंद महाराज की अगुवाई में संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं नियमित अनुदान और संगठन की मजबूती पर हुई विस्तृत चर्चा…
रतनपुर-[जनहित न्यूज़] धार्मिक एवं पौराणिक नगरी रतनपुर स्थित महामाया धर्मशाला में सोमवार को राज्य प्राच्य संस्कृत विद्यालय संघ छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में संभाग स्तरीय बैठक आयोजित की गई। पूर्व संस्कृत बोर्ड अध्यक्ष स्वामी परमानंद जी महाराज की अगुवाई में आयोजित बैठक में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ संस्कृत विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीरता से मंथन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका परिषद रतनपुर के अध्यक्ष लव कुश कश्यप ने की।
बैठक में संभागभर से पहुंचे संघ के महिला एवं पुरुष पदाधिकारी, कार्यकर्ता, संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा आसपास के क्षेत्रों के नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
संस्कृत को मिले संरक्षण, विद्यालयों की समस्याओं के समाधान पर जोर
बैठक में संघ द्वारा निर्धारित उद्देश्यों एवं प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और साहित्य की महत्वपूर्ण आधारशिला रही है। वेद, उपनिषद, पुराण, धार्मिक ग्रंथों सहित भारतीय दर्शन एवं आध्यात्मिक परंपरा में संस्कृत का विशिष्ट स्थान है। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत को केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा मानने के बजाय इसे आधुनिक शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों को नियमित अनुदान की मांग-:
बैठक में प्रदेश के समस्त मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों को नियमित अनुदान की पात्रता प्रदान करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। साथ ही पूर्व में संचालित संस्कृत विद्यालयों से संबंधित व्यवस्थाओं को पुनः व्यवस्थित करने, विद्यालय संचालन से जुड़े नियमों को सरल एवं सुगम बनाने तथा संस्कृत शिक्षा से जुड़े लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के बिना संस्कृत शिक्षा को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर आवश्यक पहल किए जाने की आवश्यकता है।
नई पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि जगाने पर जोर
बैठक में कहा गया कि बदलते दौर में संस्कृत को नई पीढ़ी से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके लिए विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और संस्कृत शिक्षकों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार, जागरूकता कार्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित किए जाने पर बल दिया गया।
स्वामी परमानंद जी महाराज ने संस्कृत की प्राचीनता और महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
संगठन की मजबूती और आगामी रणनीति पर भी मंथन-:
बैठक में प्रदेश के मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों की एकजुटता, संगठन को मजबूत करने तथा विद्यालयों एवं संस्कृत शिक्षा से जुड़े लोगों की मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। संभाग एवं जिला स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर संस्कृत शिक्षा से जुड़े विषयों पर निरंतर चर्चा करने और आवश्यक कदम उठाने पर सहमति बनी।
महामाया धर्मशाला में आयोजित यह संभाग स्तरीय बैठक संस्कृत भाषा एवं संस्कृत शिक्षा के संरक्षण, संवर्धन और विद्यालयों की समस्याओं के समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद रतनपुर अध्यक्ष लव कुश कश्यप सहित संभाग स्तरीय पदाधिकारी, महिला एवं पुरुष सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और क्षेत्र के नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


