बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर नाग पंचमी का पर्व देशभर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया जाता है। सिंधी समाज में यही पर्व पारंपरिक रूप से ‘गोगड़ा पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। सोमवार को बिलासपुर के शनिचरी पड़ाव स्थित भाई वरिया राम गुरुद्वारा सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर सिंधी समाज के लोगों ने विधि-विधान से नागदेवता की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और बच्चों की दीर्घायु की मंगलकामना की।
सिंधी समाज की सरिता डोडवानी ने बताया कि गोगड़ा पर्व सिंधी समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। इस पर्व की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। परिवार की महिलाएं घरों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं, जिनमें मीठा लोला (मीठी रोटी), नमकीन रोटी यानी कोकी, दही बड़े, तली हुई सब्जियां सहित अनेक पकवान प्रमुख होते हैं।
रात्रि में भोजन तैयार करने के बाद चूल्हे की पूजा की जाती है। चूल्हे पर कच्चा दूध, चावल और जल अर्पित कर महिलाएं हाथ जोड़कर परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। इसके बाद चूल्हे को ठंडा किया जाता है। यह परंपरा सिंधी समाज की पुरातन धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ी हुई है। पीपल और बरगद के वृक्ष की पूजा, नागदेवता को लगाया भोग।
गोगड़ा पर्व के दिन सुबह महिलाएं तैयार किए गए पकवान लेकर पीपल अथवा बरगद के वृक्ष के पास पहुंचती हैं। वहां मौली का धागा बांधकर दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। कच्चा दूध, भीगे चने तथा आटा, घी और शक्कर से तैयार प्रसाद अर्पित कर वृक्ष को नागदेवता का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना की जाती है।
इसके बाद घर में बनाए गए मीठे लोले सहित अन्य पकवानों का भोग लगाया जाता है।

महिलाएं नागदेवता एवं सभी देवी-देवताओं से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य, समृद्धि और बच्चों की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजा के पश्चात पल्लव पहनकर अरदास की जाती है और परिवार के सभी सदस्य इन पारंपरिक पकवानों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
नाग पंचमी से शुरू होता है सिंधी समाज के प्रमुख पर्वों का सिलसिला:-
सरिता डोडवानी ने बताया कि सिंधी समाज में गोगड़ा पर्व का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी पर्व के साथ समाज के प्रमुख धार्मिक त्योहारों का सिलसिला शुरू माना जाता है, जो कार्तिक माह की पूर्णिमा तक विभिन्न पर्वों के रूप में चलता है।
समाज की मान्यता के अनुसार नागों की माता मानसी देवी ने भगवान शिव की आराधना कर नागों की पूजा का वरदान मांगा था। भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि सावन माह की पंचमी के दिन सर्वप्रथम नागों की पूजा होगी और इसके बाद अन्य पर्व-त्योहार मनाए जाएंगे। इसी धार्मिक मान्यता के चलते सिंधी समाज में नाग पंचमी को गोगड़ा पर्व के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
महिलाओं ने निभाई परंपरा, बड़ी संख्या में जुटा समाज

गोगड़ा पर्व के अवसर पर सरिता डोडवानी, कोमल वाधवानी, कविता डोडवानी, वर्षा वाधवानी, आशा नागदेव, निकिता डोडवानी, सविता मलधानी, एकता डोडवानी, पलक डोडवानी, कौशल्या जगवानी, खुशबू साधवानी, प्रिया हरियानी, आशा चावला, पारी नागदेव, मीरा हरजानी सहित बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में सहभागिता की।
पूरे शहर में सिंधी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को जीवंत रखते हुए गोगड़ा पर्व को श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया। पर्व ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि नई पीढ़ी को सिंधी समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया।

