बारिश से काम में देरी का हवाला भुगतान रोकने और कटौती पर उठाए सवाल… विभाग बोला…
सिर्फ देरी वाले 5 से 7 बिलों में हुई कटौती…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] कृषि पंप कनेक्शन के काम में देरी के नाम पर बिल से 10 फीसदी तक पेनल्टी काटे जाने से नाराज बिजली ठेकेदारों का गुरुवार को गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ठेकेदार विद्युत विभाग के कार्यालय पहुंचे और ईई के चेंबर में घुसकर विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित ठेकेदारों ने शर्ट उतारकर जमीन पर बैठकर विभागीय कार्रवाई का विरोध जताया। इस दौरान भुगतान में देरी और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी जमकर सवाल उठाए गए।
बारिश और फसल बनी काम में देरी की वजह
ठेकेदारों का कहना है कि कृषि पंप कनेक्शन के लिए खेतों तक बिजली लाइन और केबल बिछाने का काम लगातार बारिश और खेतों में खड़ी फसल के कारण प्रभावित हुआ। खराब मौसम के चलते निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करना मुश्किल था। बारिश थमने के बाद काम पूरा कर बिल विभाग में जमा किए गए, लेकिन देरी का हवाला देकर कुछ बिलों में 10 फीसदी तक पेनल्टी काटने का निर्देश दिया गया।
काम पूरा होने के बाद भी भुगतान पर सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि काम में आ रही दिक्कतों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को पहले ही दी गई थी। इसके बावजूद काम पूरा करने और बिल जमा करने के बाद भुगतान में देरी की जा रही है। ठेकेदारों ने सवाल उठाया कि जब कार्य पूर्ण हो चुका है तो पेनल्टी कटौती और भुगतान रोकने का औचित्य क्या है…?
ठेकेदारों ने योजना शाखा के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका आरोप है कि बिना पैसे दिए फाइल आगे बढ़ाने में परेशानी होती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग ने कहा…
सभी बिलों में नहीं हुई कटौती:-
वहीं विद्युत विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों के आरोपों पर स्पष्ट किया कि सभी बिलों में पेनल्टी नहीं काटी गई है। विभाग के अनुसार करीब 5 से 7 बिलों में ही कटौती की गई है और यह उन्हीं कार्यों में हुई है, जहां निर्धारित समय सीमा के बाद काम पूरा किया गया।
482 किसानों के कनेक्शन, 20 ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर
जिले में करीब 482 किसानों को कृषि पंप कनेक्शन दिया जाना है। इसके लिए खेतों तक विद्युत लाइन पहुंचाने और कनेक्शन का काम पूरा कराने विभाग ने करीब 20 ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर जारी किए हैं। अब पेनल्टी कटौती और भुगतान में देरी को लेकर ठेकेदारों के खुलकर विरोध में उतरने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

