आईजी व डीआईजी रामगोपाल गर्ग
एसएसपी रजनेश सिंह की पहल से आमने-सामने हुआ पुलिस और समाज…!
सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने व्यापारियों की साइबर सुरक्षा व ट्रैफिक अव्यवस्था पर दिए सुझाव …!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
बिलासपुर साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच बिलासपुर पुलिस ने जागरूकता की दिशा में एक अभिनव और प्रभावशाली पहल करते हुए मंगलवार को लाल बहादुर शास्त्री सभागार में “साइबर संवाद” का आयोजन किया। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग एवं उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस, मीडिया, बैंकिंग क्षेत्र, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने सीधे संवाद किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल साइबर अपराध से बचाव की जानकारी देना नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पीछे काम करने वाली अपराधियों की मानसिकता, उनके मनोवैज्ञानिक हथकंडों और ठगी के बाद तत्काल उठाए जाने वाले कदमों को वास्तविक घटनाओं के माध्यम से समझाना रहा।
आईजी गर्ग ने खोली साइबर ठगों की कार्यप्रणाली-:
कार्यक्रम में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि साइबर अपराधी पहले व्यक्ति का विश्वास जीतते हैं और बातचीत के दौरान उसकी परिस्थितियों, भय, लालच अथवा अन्य कमजोरियों को पहचानकर उसी का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद दबाव या भ्रम की स्थिति पैदा कर पीड़ित से स्वयं आर्थिक लेन-देन करवा लेते हैं।
उन्होंने नागरिकों से साइबर अपराधियों के मनोवैज्ञानिक जाल को समझने और किसी भी संदिग्ध फोन कॉल, संदेश अथवा ऑनलाइन गतिविधि में जल्दबाजी से निर्णय नहीं लेने की अपील की।

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया…
कैसे खाते से खुद ट्रांसफर करवा लेते हैं ठग
डीआईजी/एसएसपी रजनेश सिंह ने साइबर ठगी के दौरान अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले मनोवैज्ञानिक तरीकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ठग बातचीत के दौरान व्यक्ति को भय, जल्दबाजी और मानसिक दबाव की स्थिति में पहुंचाते हैं और इसी का फायदा उठाकर उससे बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं।
उन्होंने नागरिकों को ओटीपी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड, पिन, व्यक्तिगत जानकारी और संदिग्ध लिंक साझा नहीं करने तथा किसी भी संदिग्ध कॉल पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पहले सत्यापन करने की सलाह दी।
17 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ, पीड़ित ने सुनाई आपबीती:-
“साइबर संवाद” की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उन पीड़ितों की मौजूदगी रही, जिनकी साइबर ठगी की शिकायतों पर बिलासपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राशि होल्ड/रिकवर कराने में सहायता की।
एक पीड़ित ने बताया कि साइबर ठगों ने उसे करीब 17 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर भय और मानसिक दबाव में रखा। अपराधियों ने ऐसा वातावरण बनाया कि पीड़ित उनके निर्देशों का पालन करता रहा। कार्यक्रम में पीड़ित ने पूरी घटना साझा करते हुए बताया कि किस तरह साइबर अपराधियों के दबाव से वह इस जाल में फंस गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर थाना प्रभारी सरकंडा द्वारा कार्रवाई कर पीड़ित को इस साइबर जाल से बाहर निकालने में सहायता की गई। अन्य पीड़ितों ने भी ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं के अनुभव साझा किए। उनकी आपबीती ने उपस्थित लोगों को साइबर अपराध की वास्तविकता से रूबरू कराया।
सराफा अध्यक्ष कमल सोनी ने उठाई व्यापारियों की आवाज-:
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने व्यापारियों की ओर से महत्वपूर्ण सुझाव और सवाल रखे। उन्होंने साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए व्यापारिक समुदाय में निरंतर जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए पुलिस के इस संवादात्मक अभियान की मुक्तकंठ से सराहना की।
कमल सोनी ने व्यापारियों से जुड़े ट्रैफिक और रेहड़ी-पटरी की अव्यवस्था का मुद्दा भी पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग के लिए साइबर सुरक्षा आज व्यापारिक सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है और पुलिस तथा व्यापारी संगठनों के बीच निरंतर संवाद से कई समस्याओं का समाधान संभव है।
बच्चों की साइबर सुरक्षा पर भी हुई गंभीर चर्चा
व्यापारी संघ के रमेश गुप्ता सदस्य ने बच्चों एवं बच्चियों के साथ होने वाली साइबर बुलीइंग और ऑनलाइन उत्पीड़न से संबंधित सवाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहने और उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।
साथ ही बच्चों को अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क, संदिग्ध लिंक, मैसेज और सोशल मीडिया गतिविधियों के प्रति सावधान रहने की सलाह दी गई।
मीडिया के सवालों पर अधिकारियों ने दिए जवाब:-
कार्यक्रम में मौजूद मीडियाकर्मियों ने साइबर अपराध की मौजूदा परिस्थितियों और उससे जुड़े विभिन्न विषयों पर आईजी रामगोपाल गर्ग एवं एसएसपी रजनेश सिंह से सवाल किए। अधिकारियों ने सवालों के जवाब देते हुए साइबर अपराध की रोकथाम, शिकायत प्रक्रिया और आम नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

छात्रों से बोले आईजी…
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव-:
समापन अवसर पर आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्कूली छात्र-छात्राओं से इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति, लिंक, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करें। विद्यार्थी स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं और तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। उन्होंने बताया कि समय पर शिकायत मिलने से ठगी गई रकम को होल्ड/रिकवर कराने की संभावना बढ़ती है।

इंस्टाग्राम लाइव के जरिए घर-घर पहुंचा ‘साइबर संवाद’
कार्यक्रम को सभागार तक सीमित न रखते हुए बिलासपुर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से इसकी ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। इससे बड़ी संख्या में नागरिक सोशल मीडिया के माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े और साइबर जागरूकता का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचा।
पुलिस और समाज के बीच संवाद की मजबूत कड़ी:-
“साइबर संवाद” में शहर के प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधि, बैंक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठन, एनजीओ चेतना ग्रुप/मित्र, आओ संवारें कल अपना ग्रुप, खेल जगत से जुड़े लोग, सराफा व्यापारी, व्यापारी संघ के प्रतिनिधि तथा लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक शामिल हुए।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी) पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) रामगोपाल करियारे, नगर पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन) परमेश्वर तिलकवार, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोतवाली देवेश सिंह, निरीक्षक गोपाल सतपति सहित पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
साइबर अपराध के बढ़ते स्वरूप के बीच-:
“साइबर संवाद” ने पुलिस और समाज को एक ही मंच पर लाकर जागरूकता, अनुभव और समाधान को एक साथ जोड़ने का काम किया। वास्तविक पीड़ितों की आपबीती से लेकर पुलिस अधिकारियों के विशेषज्ञ सुझाव और व्यापारियों, मीडिया तथा विद्यार्थियों के सवालों तक यह कार्यक्रम साइबर अपराध के खिलाफ सामूहिक सजगता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया।

