ध्वजा यात्रा के पाँचवें दिन सेमरताल से लोफन्दी तक गूंजे माता के जयकारे रमतला में बच्चों महिलाओं ने निकाली भव्य झांकी भदोरियाखार और सेंदरी में जैतखाम पर अर्पित की गई श्वेत ध्वजा (पालो)…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] माँ महामाया के जयकारों से बेलतरा अंचल का गाँव-गाँव भक्तिमय हो उठा है। सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकाली जा रही शारदीय नवरात्रि ध्वजा यात्रा के पाँचवें दिन श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। सेमरताल से शुरू हुई यात्रा का गतौरी, भदोरियाखार, रमतला और सेंदरी सहित विभिन्न ग्रामों में भव्य स्वागत किया गया। कहीं जेसीबी से पुष्पवर्षा हुई, तो कहीं महिलाओं और बच्चों ने माता रानी की आकर्षक झांकी सजाई। रमतला में युवाओं ने विधायक सुशांत शुक्ला को लड्डुओं से तौलकर अभिनंदन किया। वहीं, भदोरियाखार और सेंदरी में गुरु घासीदास बाबा के जैतखाम पर श्वेत ध्वजा (पालो) अर्पित कर सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया। दिनभर गाँव-गाँव गूंजते माता के जयकारों के बीच ध्वजा यात्रा लोफन्दी पहुँची, जहाँ रात्रि में भव्य जगराते ने भक्तिमय माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया।
सेमरताल में मातृशक्ति ने किया आत्मीय स्वागत-:

पाँचवें दिन ध्वजा यात्रा का शुभारंभ सेमरताल से हुआ। सरपंच धनेत्तर सूर्यवंशी के नेतृत्व में महिलाओं और ग्रामीणों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया। मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी और ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। माँ महामाया के जयकारों के साथ यात्रा अगले पड़ाव की ओर रवाना हुई।
गतौरी में जेसीबी से हुई पुष्पवर्षा, फूलों से पटा स्वागत मार्ग-:

सेमरताल से आगे बढ़कर यात्रा गतौरी पहुँची, जहाँ सरपंच नंदू मरकाम, दिनेश सिंह ठाकुर, राजा ठाकुर सहित ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान जेसीबी के माध्यम से पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया गया। आसमान से बरसते फूलों और गूंजते जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। ग्रामीणों का उत्साह यात्रा के प्रति उनकी गहरी आस्था और सहभागिता को दर्शाता नजर आया।
जैतखाम पर श्वेत ध्वजा अर्पित कर दिया सामाजिक समरसता का संदेश-:

ध्वजा यात्रा के दौरान भदोरियाखार में पूज्य गुरु घासीदास बाबा के जैतखाम पर श्रद्धापूर्वक श्वेत ध्वजा (पालो) अर्पित की गई। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता, सद्भाव और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ इस धार्मिक परंपरा में भागीदारी निभाई।
रमतला में लड्डुओं से तौले गए विधायक सुशांत शुक्ला, माता की झांकी बनी आकर्षण
रमतला में ध्वजा यात्रा का स्वागत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

यहाँ युवाओं ने विधायक सुशांत शुक्ला को लड्डुओं से तौलकर आत्मीय अभिनंदन किया। स्वागत के इस अनूठे अंदाज ने आयोजन में उत्साह का रंग भर दिया। वहीं, बच्चों और महिलाओं ने माता रानी की विशेष झांकी निकालकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। आकर्षक धार्मिक प्रस्तुति, माता के जयकारों और ग्रामीणों की भागीदारी से पूरा गाँव भक्तिमय नजर आया।
सेंदरी में माता सेंदुरा को अर्पित की ध्वजा, जैतखाम पर चढ़ाया पालो-:

रमतला से आगे बढ़कर ध्वजा यात्रा सेंदरी पहुँची। यहाँ श्रद्धालुओं ने माता सेंदुरा को विधि-विधान से ध्वजा अर्पित की। इसके साथ ही गुरु घासीदास बाबा के जैतखाम पर श्वेत ध्वजा (पालो) चढ़ाई गई। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ इस आयोजन ने आस्था, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दिया। इसके बाद यात्रा कछार होते हुए लोफन्दी पहुँची।
लोफन्दी में चंदन यादव की टीम के जगराते ने बांधा समां-:

पाँचवें दिन की यात्रा का समापन लोफन्दी में रात्रि विश्राम के साथ हुआ। रात्रि में लोकगायक चंदन यादव की टीम ने माता के जगराते की प्रस्तुति दी। भक्ति गीतों और मधुर सुरों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्तिरस में सराबोर रखा। माँ महामाया की आराधना और जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। दिनभर की यात्रा के बाद जगराते ने श्रद्धालुओं के उत्साह को नई ऊर्जा प्रदान की।
छठवें दिन लोफन्दी से रानीगांव तक पहुँचेगी यात्रा-:

ध्वजा यात्रा के छठवें दिन लोफन्दी से प्रस्थान कर यात्रा लक्षनपुर, पेंडरवा और गोंदइया होते हुए रानीगांव पहुँचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम प्रस्तावित है। अगले पड़ाव को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। गाँव-गाँव में माँ महामाया के स्वागत की तैयारियाँ की जा रही हैं।
आस्था के साथ संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश-:

विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकाली जा रही बेलतरा की शारदीय नवरात्रि ध्वजा यात्रा धार्मिक आयोजन के साथ ग्राम्य परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को सशक्त करने का माध्यम बन रही है। यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी इसे जनआस्था का व्यापक स्वरूप दे रही है।

जगह-जगह हो रहे स्वागत और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन से पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। माँ महामाया के प्रति श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत यह यात्रा गाँव-गाँव को आस्था के सूत्र में जोड़ते हुए निरंतर आगे बढ़ रही है।

