KPMG की टीम ने OPD ICU, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर समेत प्रमुख विभागों का किया निरीक्षण…स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर दिया जोर…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में अस्पताल की व्यवस्थाओं का आकलन किया गया। NABH के छठे संस्करण के निर्धारित मानकों के तहत KPMG की बाहरी मूल्यांकन टीम ने अस्पताल का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। यह कार्यक्रम सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति की अध्यक्षता एवं निर्देशन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बैठक से हुई। इसमें संयुक्त संचालक सह चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह, पेशेंट सेफ्टी नोडल ऑफिसर डॉ. अमित कुमार ठाकुर, NABH नोडल ऑफिसर डॉ. सुचिता सिंह, असिस्टेंट नोडल ऑफिसर गरिमा पांडेय सहित सभी विभागाध्यक्ष, नर्सिंग अधीक्षक और नर्सिंग इंचार्ज मौजूद रहे।
KPMG की मूल्यांकन टीम में एसोसिएट डायरेक्टर पारस साहनी, असिस्टेंट मैनेजर डॉ. दीपिका वर्मा, सीनियर कंसल्टेंट जयेश तावड़े और डॉ. संपदा साहू शामिल रहे।
प्रमुख विभागों में पहुंची टीम, व्यवस्थाओं की ली जानकारी-:

बैठक के बाद मूल्यांकन दल ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। इसमें बाह्य रोगी विभाग (OPD), भर्ती मरीजों का विभाग (IPD), इमरजेंसी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक, फार्मेसी, प्रयोगशाला और रेडियोलॉजी विभाग शामिल रहे।
टीम ने इन विभागों में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं, संक्रमण की रोकथाम, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। साथ ही NABH के निर्धारित मानकों के अनुरूप अस्पताल की कार्यप्रणाली का आकलन किया गया।
बेहतर इलाज और सुरक्षित माहौल बनाने पर जोर-:

इस पहल का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में गुणवत्ता संबंधी मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करना और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार करना है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के साथ मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसका अहम हिस्सा है।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के निर्देशन में सिम्स प्रबंधन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और NABH के मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल की गई। इससे अस्पताल में सुरक्षित, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

