पद पर रहते हुए गेमनानी ने कितने फर्जी नियमितीकरण कर दिए कितने लोगों को प्रताड़ित किया इसकी भी जांच होनी चाहिए-●
👉02 साल के लिए हुई थी प्रतिनियुक्ति पर 6 साल तक टिका रहा गेमनानी आखिर क्यों…?
👉जिन्होंने लाया वे अब भी लगा रहे जोर जांच की आंच उन पर भी आएगी…
👉बिना अनुमति निर्माण के नियमितीकरण में भी लगा है करोड़ो के खेल का आरोप जांच बेहद आवश्यक…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] लगातार मिल रही। शिकायतों और हो रही फजीहत के बाद अंततः कलेक्टर ने चर्चित वरिष्ठ योजना सहायक मयूर गेमनानी को टीएनसी से मुक्त कर वापस मूल विभाग ग्रामीण यांत्रिकी भेज दिया। उन्हें 2 साल के लिए यहां प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था जहां वे 6 साल तक जमे रहे।
ज्ञात हो कि विगत दिनों चर्चित वरिष्ठ योजना सहायक मयूर गेमनानी को टीएनसी से मुक्त कर वापस मूल विभाग ग्रामीण यांत्रिकी भेज दिया।

मयूर गेमनानी
मयूर ने गत 12 जुलाई 2018 को टीएनसी में ज्वाईन किया। इस दौरान वे लगातार गंभीर आरोपो से घिरे रहे। बिना अनुमति निर्मित भवनों के नियमितीकरण में भी उन पर गम्भीर आरोप लगते रहे कई शिकायतें भी हुई। बताया जा रहा कि कलेक्टर ने जांच कराई तो प्रतिनियुक्ति समिति ने मयूर के खिलाफ गंभीर शिकायत होना पाया। समिति ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि मयूर की प्रतिनियुक्ति के समय को पूरा हुए 4 साल बीत गया। उनके खिलाफ गंभीर किस्म की शिकायतें भी हैं। विभाग में और ज्यादा सेवा लेना गलत होगा। इसलिए शर्तों के अनुसार उन्हें मूल विभाग भेजा जाए।
कलेक्टर ने रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए मयूर गेमनानी को नगर तथा ग्राम निवेश की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। साथ ही समिति की शिकायतों का पुलिन्दा भी विभाग के हवाले किया है।

बताते चले कि दरअसल मयूर गेमनानी महज मोहरा था असल उसके गार्ड फादर तो निगम में बैठे है,क्योकि नियमितिकरण की फ़ाइल पहले नगर निगम में जाती है और वहा उस भवन के नक्शे व नियमितीकरण हेतु पेनाल्टी निर्धारित होती है और फिर टीएनसी विभाग सड़क व नाले की जाँच करता है बस खेल यही से शुरू हो जाता है निगम के गॉड फादर द्वारा टीएनसी में भेजी गई फ़ाइल की पहले से ही प्रसादी तय कर दी जाती है और इस प्रसादी को श्री गेमनानी के करकमलों द्वारा ग्रहण कर दोनों में बंटवारा हो जाता है तथा जिसकी प्रसादी नही मिलती उसमे कोई भी मीन-मेक निकाल कर उस फ़ाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है और कोई ज्यादा हल्ला करता है तो उसे निरस्त कर दिया जाता है, यही खेल है जिसमे नगर निगम में बैठे गॉड फादर और टीएनसी में बैठे मयूर गेमनानी द्वारा उचित अथवा अनुचित करार कर दिया जाता है।
हम यह नही कहते कि सारे ही नियमितीकरण फर्जी है। परंतु पिछले सत्र में करीब दस हजार नितमितिकरण के आवेदन आये जिनमे से चार हजार आवेदनों का निराकरण किया गया उन निराकृत आवेदनों की यदि नियमानुसार जाँच की जाएगी तो कई विस्फ़ोटक परिणाम सामने आएंगे तब पता चलेगा कि दोनों विभागों में बैठे इन शूरवीरो ने शासन को कितना चूना लगाया और कितने आम नागरिकों को जो कि बिल्कुल ही सही थे। पर प्रसादी न चढ़ाएं जाने पर इन अधिकारियों ने उन आम जन को खून के आंसू रुलाए… यहाँ हम
किसी पर आरोप प्रत्यारोप नही लगा रहे।
बल्कि हम शासन से पिछले सत्र के सभी नियमितीकरण की जाँच कराने ध्यान आकर्षित कर रहे है और यह सब आम जनता जो
नियमितिकरण के नाम पर प्रताड़ित किये गए लोगो के बयान पर आधारित है।
क्योंकि जांच उपरान्त जो कुछ सामने निकल कर आएगा वो रौंगटे खड़े कर देने वाला परिणाम होगा।
और किस तरह इन लोगो ने आम जनता के साथ अत्याचार किया व शासन को राजस्व का कितना नुकसान पहुंचाया सब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा…।
नोट-अगले एपीसोड में हम उस कथिक गॉड फादर के नाम का करेंगे खुलासा…!

