रिवर व्यू की मारपीट ने दिया सबक…
सिविल लाइन पुलिस की संवेदनशील कार्रवाई एसएसपी ने की सराहना…
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
रिवर व्यू इलाके में दो गुटों के युवकों के बीच हुआ विवाद और मारपीट सिर्फ पुलिस केस का मामला नहीं, बल्कि समाज के हर युवा के लिए एक गहरी सीख है। कुछ पलों के गुस्से ने न केवल युवाओं की छवि धूमिल की, बल्कि उनके माता-पिता की आँखों में शर्म और चिंता दोनों भर दी।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई इस घटना में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस जांच कर रही है, पर असली सवाल यह है कि आखिर हमारे युवा कब समझेंगे कि बहादुरी का मतलब ताकत दिखाना नही बल्कि अपने गुस्से पर काबू रखना है।
युवाओं की अश्लील गाली-गलौज और फिर हाथापाई… यह किसी “हीरोइज़्म” का प्रतीक नहीं बल्कि जिम्मेदारी की कमी का आईना है। कुछ क्षणों का अहंकार अब दोनों पक्षों को कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक आलोचना के बीच ले आया है।
माता-पिता की पीड़ा सबसे बड़ी सज़ा है
जिस वक्त पुलिस उनके बच्चों का नाम एफआईआर में लिख रही थी, उस वक्त घरों में बैठे उनके माता-पिता के दिल टूट गए होंगे। जिस बेटे पर गर्व होता था, वही अब पुलिस थाने और अस्पताल के चक्कर काट रहा है यह किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय पीड़ा है।
कानूनी कार्रवाई से ज़्यादा ज़रूरी आत्म-संयम
इन युवकों में से कुछ नाबालिग भी हैं। अब वे विधि से संघर्षरत बालक की श्रेणी में आ गए हैं। यानी उनका भविष्य पुलिस और अदालत के बीच झूल सकता है। यह वह दौर है जब युवाओं को अपनी पढ़ाई, करियर और सपनों पर ध्यान देना चाहिए, न कि सड़क पर बोलचाल की बहादुरी दिखाना।
युवा वर्ग के लिए संदेश सच्ची शान अपनी भाषा और व्यवहार में होती है-:
एक गलत कदम न सिर्फ कानून के जाल में फंसा देता है, बल्कि माता-पिता की उम्मीदों को भी तोड़ देता है।
गुस्से में लिया गया एक निर्णय, जीवनभर पछतावा बन सकता है।
जनहित न्यूज़ की अपील…
बिलासपुर के युवाओं से निवेदन है कि वे रिवर व्यू जैसे शांत स्थानों को विवाद की जगह नहीं, सकारात्मक सोच और आत्म-संवाद की जगह बनाएं। अपनी ऊर्जा समाज-निर्माण, खेल, कला या शिक्षा में लगाएँ क्योंकि असली मर्दानगी और हिम्मत वही है जो खुद पर नियंत्रण रख सके।

मारपीट की इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने थाने पहुंचकर एक दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पहले पक्ष की रिपोर्ट में लाला रजक की शिकायत पर नागेश बंजारे और उनके साथ विधि से संघर्षरत बालकों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 1265/25 दर्ज किया गया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126(2) (मारपीट/चोट पहुंचाना), 296 (लोक स्थान में अश्लील कृत्य), 351(2) (अपराधिक बल), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वही दूसरे पक्ष की शिकायत में सार्थी खरे की रिपोर्ट पर लाला राजक और संदीप कश्यप के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296, 351(2), 115(2) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

