प्राचार्या श्रीमती निवेदिता सरकार ने अभिभावकों एवं शिक्षकों को दिया प्रेरणादायक संदेश…बच्चों के प्रति हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए यह विश्वास रखना चाहिए कि बच्चा यह काम कर सकता है…
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर आज ड्रीमलैंड हायर सेकेंडरी स्कूल में “बोल बेबी बोल” प्रतियोगिता का भव्य एवं ज्ञानवर्धक आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में नन्हे-नन्हे बच्चों ने प्रश्नों के ऐसे अनोखे, मासूम और बालसुलभ उत्तर दिए कि उपस्थित शिक्षक, अभिभावक एवं दर्शकगण आनंदित और प्रफुल्लित हो उठे।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि चारों हाउस की शिक्षिकाओं से पहले यह पूछा जाता था कि क्या बच्चा प्रश्न का उत्तर दे पाएगा या नहीं। इसके बाद बच्चों द्वारा दिए गए अप्रत्याशित, रचनात्मक और सहज उत्तरों ने यह सिद्ध कर दिया कि बाल मन की सोच पारंपरिक सीमाओं से कहीं आगे होती है।



इस प्रतियोगिता ने न केवल बच्चों की दिमागी कसरत को मजबूती दी, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास, जिज्ञासा और आत्मविश्वास को भी नई दिशा प्रदान की।
प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे।



नालंदा हाउस… प्रथम स्थान
तक्षशिला हाउस… द्वितीय स्थान
एलोरा हाउस… तृतीय स्थान
सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रोत्साहित करने हेतु विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती निवेदिता सरकार द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।

उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बच्चों के उत्तर अक्सर हमें सिखाए गए ढर्रे से हटकर होते हैं और यही उनकी मौलिक सोच की पहचान है।

विद्यालय बच्चों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
ड्रीमलैंड स्कूल की प्रेसिडेंट श्रीमती नीलिमा सरकार के दूरदर्शी विचारों और बच्चों के सपनों को साकार करने के संकल्प के कारण ही ड्रीमलैंड आज शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती पुष्पा बैगुर एवं श्रीमती सीमा भट्टाचार्य द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी मधुर कविताओं एवं ज्ञानवर्धक जानकारी से कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम की सफलता में सभी शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या श्रीमती निवेदिता सरकार ने अभिभावकों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।यह विश्वास रखना चाहिए कि बच्चा यह काम कर सकता है।

साथ ही उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि घर के रोज़मर्रा के कार्यों के दौरान बच्चों से संवाद बनाए रखें, सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछें, क्योंकि बातचीत के माध्यम से दी गई शिक्षा बच्चों के मन में स्थायी रूप से बस जाती है।

यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता था, बल्कि सकारात्मक सोच, बाल मनोविज्ञान और जीवनपरक शिक्षा का एक ऐतिहासिक उदाहरण बनकर सामने आया।


