सीपत पुलिस की टीम की मुस्तैदी…! घेराबंदी कर पिकअप में लदे 16 नग सागौन लट्ठे डीजल आरा मशीन सहित
5 आरोपियों को धर-दबोचा…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
लगता है जंगल की रखवाली अब पेड़-पौधों के भरोसे ही छोड़ दी गई है। तभी तो ग्राम जेवरा के जंगल से सागौन की लकड़ी कटती रही, पिकअप में भरकर रवाना भी हो गई, और वन विभाग को भनक तक नहीं लगी। शुक्र है कि सीपत पुलिस की टीम को सूचना मिल गई, वरना “जंगल में मंगल” का यह सिलसिला यूं ही चलता रहता।
ऐसे खुली पोल
26 फरवरी की रात सूचना मिली कि जेवरा जंगल से कुछ लोग सागौन के पेड़ काटकर लकड़ी चोरी कर रहे हैं और उसे पिकअप वाहन क्रमांक CG-11 AB-0612 में भरकर जांजगीर की ओर ले जा रहे हैं। सूचना पर थाना सीपत की टीम ने की घेराबंदी
पुलिस ने जब संदिग्ध पिकअप को रोका और पन्नी हटाकर देखा, तो उसमें 16 नग सागौन के लट्ठे मिले। साथ में लकड़ी काटने की डीजल आरा मशीन भी बरामद हुई। पुलिस ने मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

गिरफ्तार आरोपी
रामचंद कुर्रे (41) – बिरगहनी, थाना बलौदा, जांजगीर-चांपा
संतोष कुमार (50) – बिरगहनी, थाना बलौदा, जांजगीर-चांपा
जय सिंह ओगरे (62) – ठरगा बहरा, थाना बलौदा, jांजगीर-चांपा
लिल्लू राम पटेल (56) – महुदा, थाना बलौदा, जांजगीर-चांपा
रघुवीर सिंह मरावी (40) – महुदा, थाना बलौदा, जांजगीर-चांपा
जब्त संपत्ति
16 नग सागौन लकड़ी – ₹65,827
डीजल आरा मशीन व ब्लेड – ₹6,000
पिकअप वाहन – ₹1,50,000
कुल कीमत – ₹2,21,827
सवालों के घेरे में वन विभाग
इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जंगल की निगरानी का जिम्मा किसके पास है? अगर पुलिस रात में सूचना पर तुरंत कार्रवाई कर सकती है, तो क्या वन विभाग के पास जंगल की कोई नियमित गश्त व्यवस्था नहीं..?
व्यंग्य यही कहता है कि या तो जंगल “स्व-सेवा” मॉडल पर चल रहा है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी कागजों में ही गश्त कर रहे हैं।
फिलहाल, सीपत पुलिस की सक्रियता से सागौन की तस्करी का एक मामला जरूर पकड़ा गया है, लेकिन यह घटना जंगल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गई है।
अब देखना यह है कि वन विभाग जागता है या फिर जंगल में मंगल यूं ही चलता रहेगा।

