समाज में जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण बना स्व:सुशील सगदेव का सिम्स में देहदान…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
मानव सेवा, चिकित्सा शिक्षा और समाज जागरूकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब टिकरापारा निवासी स्वर्गीय सुशील सगदेव (60 वर्ष) ने अपने निधन के पश्चात अपना पार्थिव शरीर सिम्स चिकित्सालय को देहदान के रूप में समर्पित किया। उनका यह महान निर्णय न केवल चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए अध्ययन और शोध का महत्वपूर्ण आधार बनेगा, बल्कि समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सशक्त संदेश भी देगा।
स्वर्गीय सुशील सगदेव का यह देहदान मानवता, सेवा और परोपकार की सर्वोच्च भावना को दर्शाता है। चिकित्सा शिक्षा में देहदान का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इससे मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना और अंगों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। ऐसे दान से भविष्य के चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण मिलता है, जिसका सीधा लाभ समाज और मरीजों को मिलता है।

इस पुण्य कार्य में उनके परिवारजनों ने भी पूर्ण संवेदनशीलता और सहयोग का परिचय दिया। उनकी धर्मपत्नी ममता सुशील सगदेव, पुत्री समृद्धि, पुत्र शुभम सहित परिजनों ने उपस्थित रहकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक वातावरण भी देखने को मिला, जहां ब्रह्माकुमारी परिवार की बहनों और भाइयों ने उपस्थित होकर आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की और श्रद्धासुमन अर्पित किए।
देहदान की प्रक्रिया सिम्स के एनाटॉमी विभाग द्वारा पूर्ण की गई। इस दौरान उपस्थित चिकित्सकों ने बताया कि इस प्रकार का दान मेडिकल शिक्षा के लिए अत्यंत अमूल्य होता है और विद्यार्थियों को शरीर रचना विज्ञान का गहन व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है।
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह केवल एक दान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सर्वोच्च सेवा और त्याग का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी इसे समाज के लिए अत्यंत प्रेरक और उपयोगी निर्णय बताया।

सिम्स परिवार ने स्वर्गीय सुशील सगदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके इस महान कार्य को चिकित्सा शिक्षा और समाज सेवा के लिए अमूल्य योगदान बताया।
निसंदेह, स्वर्गीय सुशील सगदेव का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा है।जो यह संदेश देता है कि जीवन के बाद भी मानवता की सेवा का मार्ग खुला रहता है।

