मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार समाधान शिविर में 80 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की प्रदान…!
दिव्यांगों के खिल उठे चेहरे…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के दौरान हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविर में 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान की। ट्राईसाइकिल मिलते ही उनके चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास की चमक दिखाई देने लगी। वर्षों से रोजमर्रा के कामों, रोजगार और शिक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाले इन दिव्यांगजनों के लिए यह केवल एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और नए सपनों की उड़ान का माध्यम बन गया है।
बिरकोना निवासी श्रीमती वीणा सिंह के लिए यह ट्राईसाइकिल किसी वरदान से कम नहीं है। निजी नौकरी करने वाली वीणा को प्रतिदिन अपने कार्यस्थल पहुंचने के लिए दूसरों से लिफ्ट लेनी पड़ती थी। बाजार जाना हो, बच्चों को स्कूल से संबंधित कोई काम हो या अपनी छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी करनी हों, हर बार किसी न किसी का सहारा लेना पड़ता था।

ट्राईसाइकिल मिलने के बाद भावुक होकर उन्होंने कहा कि अब वे अपने समय और अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी आ-जा सकेंगी। उनके लिए यह वाहन स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का नया प्रतीक बन गया है। मस्तूरी की श्रीमती राजीन कुर्रे भी आज बेहद खुश नजर आईं। सिलाई का काम कर अपने परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने वाली राजीन को काम के लिए आवश्यक सामान लाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार दूसरों की उपलब्धता का इंतजार करना पड़ता था।

अब मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने से वे अपना काम और अधिक सुगमता से कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि अब वे अपने व्यवसाय से जुड़ी जरूरतों के साथ-साथ अपने बच्चों की आवश्यकताओं को भी स्वयं पूरा कर पाएंगी। कोटा विकासखंड के नवागांव की रहने वाली सतरूपा बंजारे के लिए यह दिन विशेष यादगार बन गया। कक्षा 11वीं में अध्ययनरत सतरूपा के सामने स्कूल आने-जाने की समस्या हमेशा बनी रहती थी।

आवागमन की कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद अब उनके लिए शिक्षा की राह आसान हो जाएगी। सतरूपा का कहना है कि अब वे नियमित रूप से स्कूल जा सकेंगी और अपने सपनों को नई उड़ान दे सकेंगी।
हेमुनगर का यह शिविर केवल ट्राईसाइकिल वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाने का अवसर था, जिनके लिए हर दिन का सफर एक संघर्ष हुआ करता था। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने से अब ये दिव्यांगजन न केवल अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, बल्कि आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर भी मजबूती से कदम बढ़ा सकेंगे।

