चिकित्सकों ने लेप्रोस्कोपी से चुनौतीपूर्ण व दुर्लभ जटिल सर्जरी में पाई सफलता…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। सिम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पहली बार लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से लिवर में स्थित 12 सेंटीमीटर की विशाल हाइडेटिड सिस्ट का सफल ऑपरेशन कर नई मिसाल कायम की है। विशेषज्ञों के अनुसार जहां सामान्यतः छोटी हाइडेटिड सिस्ट का ऑपरेशन भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है, वहीं लिवर के ऊपरी और अंदरूनी हिस्से में स्थित इतनी बड़ी सिस्ट को दूरबीन पद्धति से निकालना अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया थी।
उमरिया (सरगांव) निवासी 15 वर्षीय होमराज मिरी पिछले एक वर्ष से लगातार पेट दर्द से परेशान था। कई निजी अस्पतालों में उपचार कराने के बावजूद राहत नहीं मिली और आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। अंततः वह सिम्स पहुंचा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच और सीटी स्कैन में उसके लिवर में लगभग 12 सेंटीमीटर की विशाल हाइडेटिड सिस्ट की पहचान की। इस सिस्ट में लगभग एक लीटर परजीवी द्रव भरा हुआ था।
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश राज के नेतृत्व में डॉ. शुभा इक्का एवं उनकी टीम ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान सिस्ट में भरे परजीवी द्रव को पूरी सावधानी के साथ बाहर निकाला गया ताकि संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में न फैले। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में डॉ. मिल्टन एवं उनकी टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की लगातार निगरानी की, जबकि सिस्टर इंचार्ज योगेश्वरी और नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार हाइडेटिड सिस्ट डॉग टेपवर्म नामक परजीवी के संक्रमण से होती है। संक्रमित कुत्तों या पशुओं के संपर्क से यह परजीवी मनुष्य के शरीर में पहुंचकर लिवर सहित अन्य अंगों में सिस्ट बना सकता है। समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
सफल सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ और पूर्णतः सामान्य होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि यह सफलता सिम्स की विशेषज्ञ चिकित्सा क्षमता, आधुनिक तकनीक और चिकित्सकों की दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में हाइडेटिड रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच कराने की अपील की।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि सिम्स में जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। यह उपलब्धि मरीज-केंद्रित चिकित्सा सेवा, तकनीकी दक्षता और विभागों के उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है तथा इससे प्रदेश और संभाग के मरीजों का सिम्स पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि सिम्स चिकित्सालय आधुनिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सकों के दम पर अत्यंत जटिल एवं जोखिमपूर्ण सर्जरी को भी सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम है।

