बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग ने गले की गंभीर एवं जानलेवा पेनिट्रेटिंग नेक ट्रॉमा (Penetrating Neck Trauma) के दो अत्यंत जटिल मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर संस्थान की उच्चस्तरीय आपातकालीन एवं शल्य चिकित्सा सेवाओं की उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया है। समय पर सटीक निदान, त्वरित शल्य चिकित्सा एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्परता के कारण दोनों मरीजों का जीवन सुरक्षित रखा जा सका। वर्तमान में दोनों मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
इन दोनों मरीजों का उपचार ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वी. बी. साहू तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक किया गया।

पहला मामला 45 वर्षीय पुरुष का था, जिसे 18 जून 2026 को स्वयं द्वारा पहुंचाई गई गले की गहरी एवं खुली चोट के साथ सिम्स लाया गया। जांच में गले के अग्र भाग में गहरा चीरा पाया गया, जिसमें अंदरूनी ऊतक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए लोकल एनेस्थीसिया के अंतर्गत नेक एक्सप्लोरेशन एवं घाव की शल्य मरम्मत की। समय पर किए गए उपचार से मरीज की स्थिति शीघ्र ही स्थिर हो गई और उपचार पूर्ण होने के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

दूसरा मामला 30 वर्षीय पुरुष का था, जिसे 15 जून 2026 को धारदार हथियार (ब्लेड) से हुए हमले के बाद गले में गंभीर चोट एवं अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। तत्काल शल्य परीक्षण के दौरान गले की प्रमुख रक्त वाहिनियों में गंभीर क्षति पाई गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रभावित रक्त वाहिनियों का सफल वैस्कुलर लिगेशन (Vascular Ligation) कर रक्तस्राव को नियंत्रित किया तथा आवश्यक जीवनरक्षक उपचार प्रदान किया। उपचार के बाद मरीज के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ और चिकित्सकीय रूप से पूर्णतः स्वस्थ एवं स्थिर होने पर उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में वह सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों मरीजों की चोटें गले की अत्यंत महत्वपूर्ण संरचनाओं कैरोटिड एवं जुगुलर रक्त वाहिनियों, श्वासनली, भोजन नली तथा प्रमुख तंत्रिकाओं के अत्यंत निकट थीं। ऐसी स्थिति में उपचार में थोड़ी-सी भी देरी मरीजों के लिए प्राणघातक सिद्ध हो सकती थी। विशेषज्ञ टीम द्वारा त्वरित निर्णय, सटीक शल्य चिकित्सा, आधुनिक उपचार पद्धति एवं विभागों के उत्कृष्ट समन्वय के कारण दोनों मरीजों का जीवन सुरक्षित रखा जा सका।
इस सफल उपचार में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम, आपातकालीन चिकित्सा विभाग, ऑपरेशन थिएटर, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य सहयोगी विभागों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा, सिम्स बिलासपुर प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के जटिल एवं जीवनरक्षक मामलों में हमारे विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं तथा टीमवर्क संस्थान की चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रमाण हैं। भविष्य में भी सिम्स गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा, “गोल्डन ऑवर के दौरान उपलब्ध कराई गई त्वरित चिकित्सा एवं विभिन्न विभागों के प्रभावी समन्वय के कारण दोनों मरीजों का जीवन बचाया जा सका। सिम्स का आपातकालीन चिकित्सा तंत्र 24×7 गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः सक्षम एवं सज्जित है। दोनों मरीजों का सफल उपचार हमारी चिकित्सा टीम की सामूहिक दक्षता, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यशैली का परिणाम है।
यह सफलता एक बार फिर सिद्ध करती है कि सिम्स बिलासपुर आधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों के बल पर जटिल एवं गंभीर आपातकालीन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले प्रदेश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

