किन्नर समाज की गुरु-चेला परंपरा बहस एक किन्नर की हत्या आरोपी गिरफ्तार…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर शराब की महफिल में शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। किन्नर समाज की गुरु-चेला परंपरा को लेकर हुई बहस इतनी बढ़ी कि एक किन्नर की जान चली गई। सकरी थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने न केवल एक हत्या को जन्म दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि नशा और अहंकार किस तरह पलभर में रिश्तों को मौत के मुहाने तक पहुंचा सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, चिल्हाटी निवासी किन्नर तन्नू खान, किन्नर वर्षा जान और मीरा उर्फ आशीष आपस में गुरु-भाई हैं। वर्षा जान 17 जुलाई को दिल्ली से बिलासपुर आई थी। 20 जुलाई को मीरा के आग्रह पर चारों ने जोकी स्थित मीरा के घर पर पार्टी करने का निर्णय लिया। रास्ते में किन्नर रिया उर्फ राकेश भी उनके साथ शामिल हो गया। सभी ने शराब और मछली की व्यवस्था कर देर तक पार्टी की।
पार्टी के दौरान तन्नू खान ने रिया से उसका गुरु पूछते हुए उसे अपना चेला बनने का दबाव बनाया। पुलिस के मुताबिक, किन्नर समाज की परंपरा का हवाला देते हुए तन्नू ने सालाना 10 हजार रुपये और प्रतिमाह 2 हजार रुपये गुरु दक्षिणा देने की बात कही। रिया ने स्पष्ट रूप से इनकार करते हुए कहा कि वह किसी का चेला नहीं है और न ही किसी को गुरु मानता है।
इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। मीरा और वर्षा ने विवाद शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन दोनों नहीं माने। कुछ देर बाद तन्नू और रिया पैदल तालापारा की ओर निकल गए। जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे और तन्नू का मोबाइल भी बंद मिला, तब साथियों ने उसकी तलाश शुरू की।

पूछताछ के दौरान आरोपी रिया ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि गुरु-चेला विवाद के चलते उसने एनएच-130 स्थित दलदलिहापारा बस स्टॉप के पास तन्नू खान का गला दबाकर हत्या कर दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मृतका का मोबाइल, चप्पल और चार्जर बरामद किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
संदेश:-
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि नशा, गुस्सा और अहंकार का मेल किसी भी विवाद को अपराध में बदल सकता है। बातचीत और संयम से सुलझने वाली बात जब हिंसा का रूप ले लेती है, तो उसका अंत केवल पछतावे और बर्बादी में होता है। समाज में मतभेद चाहे जितने भी बड़े हों, उनका समाधान कानून और संवाद के दायरे में ही होना चाहिए, न कि हिंसा के रास्ते पर।

