दोनों नासिका मार्ग जन्म से थे बंद जटिल सर्जरी के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम…!
परिजनों ने जताया आभार…!
बिलासपुर-{जनहित न्यूज़}
बिलासपुर गंभीर और दुर्लभ जन्मजात बीमारी Bilateral Choanal Atresia से जूझ रहे एक नवजात को बिलासपुर के श्री शिशु भवन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने सफल उपचार के बाद नया जीवन दिया। जन्म के तत्काल बाद सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे नवजात को करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट, जटिल सर्जिकल उपचार और लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग देखभाल के बाद स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
लोरमी निवासी गौसिया परवीन के नवजात का जन्म 03 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। जांच में दोनों नासिका मार्ग जन्म से ही बंद पाए गए। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसी दिन बच्चे को श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर लाया गया।

अस्पताल पहुंचने पर डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। बच्चे की स्थिति गंभीर होने के कारण सबसे पहले उसकी सांस और ऑक्सीजन की स्थिति को नियंत्रित किया गया। नवजात को करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और चिकित्सकों की टीम ने लगातार उसकी स्थिति की निगरानी की।
दुर्लभ बीमारी में समय पर उपचार बेहद जरूरी
डॉ. श्रीकांत गिरी ने बताया कि Bilateral Choanal Atresia नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है। इसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं। चूंकि नवजात प्रारंभिक अवस्था में मुख्य रूप से नाक के माध्यम से सांस लेते हैं, इसलिए दोनों मार्ग बंद होने पर गंभीर श्वसन संकट और शरीर में ऑक्सीजन की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में सबसे पहले नवजात की सांस और ऑक्सीजन की स्थिति को स्थिर करना जरूरी होता है। आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है। स्थिति स्थिर होने के बाद बंद नासिका मार्ग को खोलने के लिए आवश्यक सर्जिकल उपचार किया जाता है। इस तरह के जटिल मामलों में नियोनेटल, सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और सपोर्ट टीम के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
जटिल सर्जरी के बाद लगातार निगरानी
करीब एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद जब नवजात की स्थिति उपचार के लिए अनुकूल हुई, तब विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक तैयारी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया। सर्जरी के बाद भी बच्चे को लगातार चिकित्सकीय निगरानी और विशेष नर्सिंग देखभाल में रखा गया।
लगभग 30 दिनों तक चले उपचार, निगरानी और विशेष देखभाल के बाद नवजात ने बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। 08 अगस्त को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
पूरी टीम के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ ने भी नवजात की देखभाल में पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाई।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस सफलता का श्रेय किसी एक चिकित्सक को नहीं, बल्कि पूरी टीम के समन्वित प्रयास को जाता है। गंभीर अवस्था में बच्चे को स्थिर करने से लेकर सर्जिकल उपचार और उसके बाद की विशेष देखभाल तक प्रत्येक चरण में चिकित्सकीय टीम ने सतत निगरानी बनाए रखी।
स्वस्थ बच्चे को गोद में लेकर भावुक हुए माता-पिता
करीब एक महीने के उपचार के बाद जब नवजात को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिली, तो यह उसके माता-पिता के लिए बेहद भावुक और खुशी का क्षण था। स्वस्थ बच्चे को गोद में लेकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। उन्होंने उपचार में जुटे चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्री शिशु भवन हॉस्पिटल की यह उपलब्धि गंभीर नवजात मामलों में समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, जटिल सर्जिकल प्रबंधन, सतत निगरानी और टीमवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। जन्म के बाद गंभीर स्थिति में पहुंचे इस नन्हे मरीज का स्वस्थ होकर घर लौटना एक परिवार के लिए उम्मीद और चिकित्सा टीम के लिए समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल बन गया।

