सराफा एसोसिएशन भड़का लगाए गंभीर आरोप… विरोध के बाद मामला हुआ पंजीबद्ध पुलिस ने टेस्टिंग मशीन व dpr रिकॉर्ड किया जब्त…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन पिछले तीन वर्षों से उपभोक्ताओं के हितों और सुरक्षित सोना खरीदी को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। ग्राहकों को खरीदी के समय हॉलमार्क, HUID, कैरेट, वजन और बिल की अनिवार्य रूप से जांच करने के लिए सतर्क किया जा रहा है।
आज की घटना भी इसी जागरूकता और उपभोक्ता हित की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। एसोसिएशन का उद्देश्य व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखते हुए ग्राहकों के विश्वास और अधिकारों की रक्षा करना है।
सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित और पारदर्शी व्यापार की मजबूत नींव है। शहर के बड़े और प्रतिष्ठित मालाबार ज्वेलरी शोरूम में सोने की शुद्धता जांच को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल ग्राहक बल्कि बिलासपुर के सराफा कारोबारियों के बीच भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक ऐसे सोने के कड़े से जुड़ा है, जिस पर ग्राहक के अनुसार 22 कैरेट की शुद्धता, हॉलमार्क और HUID दर्ज था, लेकिन शोरूम की जांच मशीन ने उसे कथित तौर पर 20 कैरेट बताया। मामला तब और पेचीदा हो गया, जब उसी कड़े की दोबारा जांच के दौरान मशीन को रीफ्रेश करने के बाद परिणाम कथित तौर पर 22 कैरेट आया।
घटना के बाद बिलासपुर सराफा एसोसिएशन ने शोरूम पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर पुलिस में शिकायत की गई और पुलिस द्वारा शोरूम में लगी संबंधित जांच मशीन तथा ग्राहकों की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखने वाली DPR मशीन/रिकॉर्ड को जब्त कर जांच के लिए ले जाने की जानकारी सामने आई है। अब पूरे मामले की तकनीकी और कानूनी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पहली जांच में 20 कैरेट का परिणाम क्यों आया और बाद में वही आभूषण 22 कैरेट कैसे प्रदर्शित हुआ।
ग्राहक बलविंदर सिंह राजपाल
ग्राहक के कड़े ने खड़ा किया पूरा विवाद
जानकारी के मुताबिक बिलासपुर निवासी बलविंदर सिंह राजपाल अपना सोने का कड़ा एक्सचेंज कराने के उद्देश्य से मालाबार ज्वेलरी शोरूम पहुंचे थे। ग्राहक का कहना है कि उक्त कड़ा करीब एक वर्ष पहले उन्होंने एसके ज्वेलर्स, राजीव प्लाजा से खरीदा था और कड़े पर हॉलमार्क तथा HUID अंकित था।
शोरूम में एक्सचेंज की प्रक्रिया के दौरान सेल्समैन ने कड़े की जांच शोरूम में उपलब्ध मशीन से करने की बात कही। जांच के बाद ग्राहक को कथित तौर पर बताया गया कि कड़ा 22 कैरेट का नहीं, बल्कि लगभग 20 कैरेट का है।

यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। ग्राहक के मन में सवाल उठा कि यदि कड़ा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हॉलमार्क और HUID के साथ 22 कैरेट के रूप में खरीदा गया था तो एक वर्ष बाद उसकी शुद्धता 20 कैरेट कैसे हो गई?
ग्राहक को बताया गया, लोकल ज्वेलर्स की जांच पर भरोसा नहीं ग्राहक के बयान के अनुसार, शोरूम प्रबंधन की ओर से उसे यह समझाने का प्रयास किया गया कि छोटे या स्थानीय ज्वेलर्स द्वारा किए गए हॉलमार्क अथवा सत्यापन को शोरूम अपनी मशीन की जांच के मुकाबले मान्य नहीं मानता और शोरूम में लगी मशीन विश्व की जानी-मानी कंपनी की मशीन है, जिसके आधार पर सोने की खरीद-बिक्री की जाती है।
ग्राहक के अनुसार इस बातचीत के बाद उसे लगा कि शायद उसके साथ गलत हुआ है। वह वापस उस ज्वेलरी दुकान पर पहुंचा, जहां से उसने कड़ा खरीदा था और दुकानदार के सामने पूरी बात रखी।
दुकानदार के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बना मामला:-
जिस दुकान से कड़ा खरीदा गया था, उसके संचालक ने मामले को गंभीरता से लिया। दुकानदार के अनुसार, यदि उसके द्वारा बेचे गए कड़े पर निर्धारित हॉलमार्क और HUID मौजूद हैं तथा उसे 22 कैरेट के रूप में बेचा गया था, तो शोरूम की मशीन में 20 कैरेट आने का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
इसके बाद दुकानदार ने स्वयं ग्राहक का परिचित बनकर शोरूम जाकर उसी कड़े की दोबारा जांच कराने का प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दूसरी जांच में भी मशीन ने कथित तौर पर 20 कैरेट का परिणाम प्रदर्शित किया।

इस पर दुकानदार को जांच प्रक्रिया को लेकर संदेह हुआ। उसने शोरूम प्रबंधन के समक्ष अपना परिचय देते हुए बताया कि उक्त कड़ा उसने ही लगभग एक वर्ष पहले ग्राहक को बेचा था और उस पर हॉलमार्क एवं HUID अंकित था।
मशीन रीफ्रेश हुई और बदल गया जांच परिणाम..!
यहीं से पूरा मामला और गंभीर हो गया।
बताया जा रहा है कि इसके बाद शोरूम की मशीन को रीफ्रेश कर दोबारा जांच की गई। इस बार उसी कड़े का परिणाम कथित तौर पर 22 कैरेट आया।
एक ही आभूषण की जांच में पहले 20 कैरेट और बाद में 22 कैरेट का परिणाम सामने आने की बात ने सराफा कारोबारियों को भी चौंका दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोनों जांच में अंतर क्यों आया? क्या मशीन की सेटिंग, कैलिब्रेशन, सैंपलिंग, सतह की स्थिति अथवा जांच प्रक्रिया में कोई तकनीकी कारण था? या पहली जांच में कोई अन्य त्रुटि हुई? इसका जवाब अधिकृत तकनीकी जांच से ही सामने आ सकेगा।
BIS के नियमों में हॉलमार्क और HUID का क्या महत्व?

BIS के अनुसार हॉलमार्किंग का उद्देश्य कीमती धातु की शुद्धता/फाइननेस का आधिकारिक निर्धारण और रिकॉर्डिंग करना है। हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण पर BIS Standard Mark, शुद्धता/फाइननेस तथा छह अंकों का HUID अंकित होना अनिवार्य है। HUID को BIS CARE ऐप के Verify HUID फीचर से सत्यापित किया जा सकता है।
BIS यह भी स्पष्ट करता है कि उपभोक्ता अपने हॉलमार्क वाले आभूषण की जांच किसी BIS मान्यता प्राप्त Assaying & Hallmarking Centre से करा सकता है। ऐसे केंद्र परीक्षण के बाद पहचान संबंधी विवरण के साथ Assay Report जारी कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि BIS की गाइडलाइन के अनुसार XRF जांच सतह पर मौजूद सोने की मात्रा का परीक्षण करती है और केवल XRF के आधार पर जारी रिपोर्ट की सीमाएं होती हैं; अधिक निर्णायक परीक्षण के लिए Fire Assay पद्धति का प्रावधान है।
इसलिए इस पूरे विवाद में केवल किसी एक दुकान की मशीन के परिणाम के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय BIS मान्यता प्राप्त केंद्र की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
सराफा एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
मामले की जानकारी सामने आने के बाद बिलासपुर सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी संबंधित शोरूम पहुंचे और जांच प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। एसोसिएशन का कहना है कि यदि किसी हॉलमार्क वाले आभूषण को स्थानीय ज्वेलर द्वारा बेचा गया है और बाद में किसी अन्य मशीन से उसकी शुद्धता पर सवाल उठाया जाता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी की अगुवाई में सराफा व्यापारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत की और शोरूम के बाहर विरोध दर्ज कराया।
कमल सोनी ने आरोप लगाया कि बड़े और भव्य शोरूमों की मशीनों के आधार पर छोटे एवं पुश्तैनी सराफा कारोबारियों की वर्षों से बनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

पुलिस ने मशीन और रिकॉर्ड किया जब्त
विवाद के बाद पुलिस की कार्रवाई भी सामने आई। जानकारी के अनुसार पुलिस ने शोरूम में इस्तेमाल की जा रही संबंधित गोल्ड टेस्टिंग मशीन तथा ग्राहकों की खरीदारी से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने वाली DPR मशीन/रिकॉर्ड को जब्त कर जांच के लिए ले लिया है।
अब जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
मशीन की सटीकता और कैलिब्रेशन की स्थिति क्या थी?
क्या मशीन का हाल में कैलिब्रेशन हुआ था?
मशीन की सर्विस और मेंटेनेंस का रिकॉर्ड क्या है?
एक ही कड़े की जांच में 20 और 22 कैरेट के अलग-अलग परिणाम क्यों आए?
पहली और दूसरी जांच के समय मशीन की सेटिंग में क्या अंतर था?
कड़े पर अंकित HUID की BIS रिकॉर्ड से पुष्टि होती है या नहीं?
कड़े की स्वतंत्र जांच BIS मान्यता प्राप्त Assaying & Hallmarking Centre में क्या परिणाम देती है?
शोरूम में ग्राहकों को सोने की शुद्धता बताने की प्रक्रिया और रिकॉर्डिंग व्यवस्था क्या है?
इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
एसोसिएशन ने देशभर के बड़े शोरूमों की जांच की मांग उठाई:-
कमल सोनी प्रदेश अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन
कमल सोनी ने कहा कि यह मामला केवल एक ग्राहक या एक दुकान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि किसी बड़े शोरूम की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो संबंधित सरकारी एवं नियामक एजेंसियों को इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि देशभर में संचालित बड़े एवं भव्य ज्वेलरी शोरूमों में इस्तेमाल होने वाली गोल्ड टेस्टिंग मशीनों की कैलिब्रेशन, सटीकता और परीक्षण प्रक्रिया की नियमानुसार जांच कराई जाए तथा छोटे और पुश्तैनी सराफा व्यापारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी आधारहीन आरोप की भी जांच हो।
अब BIS जांच से खुलेगा राज..!
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि वास्तविक शुद्धता का निर्धारण किस परीक्षण से किया जाएगा। BIS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक हॉलमार्क वाले आभूषण की शुद्धता पर विवाद होने पर उपभोक्ता BIS मान्यता प्राप्त Assaying & Hallmarking Centre में जांच करा सकता है और हॉलमार्क वाली वस्तु में निर्धारित शुद्धता से कमी पाए जाने पर नियमों के तहत मुआवजे का प्रावधान भी है।

ऐसे में अब यदि विवादित कड़े का स्वतंत्र BIS मान्यता प्राप्त केंद्र में वैज्ञानिक परीक्षण, HUID सत्यापन, बिक्री बिल और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कराया जाता है, तो काफी हद तक स्थिति साफ हो सकती है।
फिलहाल मामला पुलिस जांच में है और शोरूम की मशीन तथा रिकॉर्ड जब्त किए जाने के बाद जांच के निष्कर्ष का इंतजार है। जांच में यदि मशीन की तकनीकी खामी सामने आती है तो मामला अलग दिशा लेगा, जबकि यदि जानबूझकर गलत परिणाम देने अथवा उपभोक्ता को भ्रमित करने जैसी कोई बात प्रमाणित होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस जांच और स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण पूरा होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन एक ही कड़े की जांच में 20 कैरेट से 22 कैरेट का कथित बदलाव अपने आप में ऐसा सवाल जरूर खड़ा करता है, जिसका जवाब अब वैज्ञानिक जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों से मिलना बेहद जरूरी है।
बिलासपुर सराफा एसोसिएशन का साफ संदेश है…सोने की शुद्धता और ग्राहक के भरोसे से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

