मालाबार प्रकरण के विरोध में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन बिलासपुर में बंद रहा सराफा बाजार..कलेक्ट्रेड तक निकली ऐतिहासिक पैदल यात्रा…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़]
बिलासपुर सोने की शुद्धता, HUID-हॉलमार्क व्यवस्था की विश्वसनीयता और सराफा व्यापारियों के अधिकारों को लेकर छत्तीसगढ़ में गुरुवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। बिलासपुर के एक ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम में सामने आए सोने की शुद्धता विवाद के बाद छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के सभी 33 जिलों में सराफा कारोबारियों ने एक साथ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदेशभर की जिला सराफा इकाइयों ने अपने-अपने जिलों के कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपकर सोने की जांच व्यवस्था में पारदर्शिता, HUID-हॉलमार्क प्रणाली की मजबूती और व्यापारियों के लिए समान नियमों की मांग उठाई।

बिलासपुर में बाजार बंद, सदर बाजार से कलेक्टोरेट तक गूंजा सराफा समाज का आक्रोश:-
आंदोलन का सबसे बड़ा असर बिलासपुर में देखने को मिला। यहां सराफा बाजार आधे दिन तक बंद रहा। बड़ी संख्या में सराफा व्यापारी सदर बाजार में एकत्रित हुए और हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला।

व्यापारियों ने एकजुट होकर प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई और कहा कि यह आंदोलन किसी एक प्रतिष्ठान के खिलाफ नहीं, बल्कि स्वर्ण व्यापार में पारदर्शी और समान व्यवस्था लागू कराने के लिए है।
एक कड़े की जांच ने खड़े कर दिए कई बड़े सवाल:-
मामले की शुरुआत 14 अगस्त को उस समय हुई जब बिलासपुर के एक ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम में HUID युक्त 22 कैरेट सोने के कड़े की जांच के दौरान उसकी शुद्धता को लेकर सवाल उठे। जांच में कथित रूप से इसे 20 कैरेट बताया गया, जबकि दोबारा परीक्षण में वही आभूषण 916 यानी 22 कैरेट पाया गया।

इस घटनाक्रम ने केवल एक आभूषण की शुद्धता पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि Gold Testing Machines की तकनीकी विश्वसनीयता, मशीनों के Calibration, जांच प्रक्रिया और HUID-हॉलमार्क व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
सराफा एसोसिएशन का कहना है कि यदि एक ही आभूषण की जांच अलग-अलग परिणाम दे सकती है तो आम उपभोक्ता किस व्यवस्था पर भरोसा करे, यह बड़ा सवाल है।
सराफा समाज की प्रमुख मांगें-:
सराफा एसोसिएशन ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं-:
स्वतंत्र और निष्पक्ष Gold Testing व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
HUID और Hallmark प्रणाली की सख्त निगरानी हो।
Gold Testing Machines का नियमित Calibration और तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
कमल सोनी- सराफा एसोसिएशन प्रदेश अध्यक्ष
भ्रामक विज्ञापनों पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
सोने के भाव, ऑफर और Making Charge में पूर्ण पारदर्शिता हो।
सभी ज्वेलरी प्रतिष्ठानों के लिए समान Billing व्यवस्था लागू की जाए।
पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों और पुश्तैनी सराफा व्यापारियों के हितों की रक्षा की जाए।
भारतीय स्वर्ण कला बोर्ड एवं स्वर्णकार कल्याण बोर्ड के गठन की दिशा में पहल की जाए।

ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड सभी ज्वेलरी कारोबारियों के लिए समान नियम लागू हों।
‘ब्रांड के खिलाफ नहीं, समान व्यवस्था के पक्ष में’ एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी व्यक्ति या किसी एक ब्रांड को निशाना बनाने के लिए नहीं है। व्यापारियों की मांग केवल इतनी है कि देश में सराफा व्यापार के लिए नियम सभी के लिए समान हों।
व्यापारियों का कहना है कि बड़े ब्रांडों द्वारा Zero Making Charge, Exchange Offer और अन्य प्रचार योजनाओं के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करना व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, लेकिन ग्राहकों को दी जाने वाली हर जानकारी स्पष्ट और पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।

वोकल फॉर लोकल तभी सफल होगा जब स्थानीय सराफा व्यापारी मजबूत होंगे
सराफा एसोसिएशन ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना तभी मजबूत होगी, जब स्थानीय सराफा व्यापारी, पारंपरिक स्वर्ण कारीगर और वर्षों से इस कारोबार से जुड़े परिवार सुरक्षित रहेंगे।
33 जिलों से उठी सराफा कारोबारियों की यह आवाज अब कलेक्टर कार्यालयों के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। बिलासपुर में बंद बाजार और विशाल पैदल मार्च ने इस आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दे दिया है।

अब नजर केंद्र सरकार की ओर है कि सोने की शुद्धता, जांच व्यवस्था और व्यापारिक पारदर्शिता को लेकर उठे इन सवालों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

