चांटापारा के रहवासियों की दो टूक…
पहले जमीन की नाप-जोख और ड्राइंग-डिजाइन फिर होगा पुनर्विस्थापन का फैसला…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] प्रस्तावित ऑक्सी जोन को लेकर बिलासपुर में विवाद गहराता नजर आ रहा है। चांटापारा-तिलक नगर के बड़ी संख्या में रहवासी सोमवार को विधायक अमर अग्रवाल के बंगले के बाहर पहुंच गए। रहवासियों ने ऑक्सी जोन का विरोध करने के बजाय अपनी सबसे बड़ी चिंता पुनर्विस्थापन और प्रभावित परिवारों के भविष्य को लेकर जताई। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं समेत स्थानीय लोगों ने अपनी मांगें सामने रखते हुए कहा कि किसी भी निर्णय से पहले जमीन की वास्तविक स्थिति, नाप-जोख और प्रस्तावित निर्माण की पूरी ड्राइंग-डिजाइन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए।
70 हजार वर्गफीट जमीन का हवाला, उठे कई सवाल-:
रहवासियों के मुताबिक चांटापारा-तिलक नगर क्षेत्र में करीब 70 हजार वर्गफीट जमीन खाली होने की जानकारी पूर्व में अरपा साडा के अधिकारी बरुआ द्वारा दी गई थी। अब इसी जमीन पर ऑक्सीजन गार्डन अथवा ऑक्सी जोन विकसित किए जाने की चर्चा के बीच रहवासियों ने सवाल उठाया है कि आखिर इस स्थान पर कितने आवासीय ब्लॉक बनाए जा सकते हैं और क्या यहां चांटापारा से प्रभावित सभी परिवारों का पुनर्वास संभव है?
रहवासियों की मांग है कि नगर निगम के इंजीनियरों से जमीन की विधिवत नाप-जोख कराकर उसका ड्राइंग और डिजाइन तैयार किया जाए। इसके बाद ही यह तय किया जाए कि प्रस्तावित योजना में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की कितनी गुंजाइश है।
‘पहले आशियाना उजड़ा, अब फिर विस्थापन का डर’
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि पूर्व में विकास कार्यों के नाम पर उनके घर हटाए गए और उन्हें इमलीभाठा स्थित आवासों में विस्थापित किया गया। रहवासियों का कहना है कि कोरोना काल में घरों से हटाकर इमलीभाठा भेजे जाने के बाद भी वहां आज तक पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं।
महिलाओं का कहना था कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि विकास कार्यों के लिए यदि मकान हटाए जाते हैं तो प्रभावित परिवारों के पुराने क्षेत्र में ही पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। ऐसे में अब प्रस्तावित ऑक्सी जोन को लेकर फिर विस्थापन की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
रिवर व्यू रोड को लेकर भी उठे सवाल:-
रहवासियों ने रिवर व्यू रोड के आसपास कथित तौर पर असामाजिक तत्वों के जमावड़े का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर पहले ध्यान दिया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि वे विकास अथवा हरित क्षेत्र की अवधारणा के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन्हें दोबारा विस्थापन का सामना न करना पड़े।
विधायक से हस्तक्षेप और स्थिति स्पष्ट करने की मांग:-
विधायक के बंगले के बाहर पहुंचे रहवासियों ने मांग की कि प्रस्तावित योजना से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट की जाए। जमीन कितनी है, कितने परिवार प्रभावित होंगे, कितने आवासीय ब्लॉक बन सकते हैं और पुनर्वास की व्यवस्था किस स्थान पर होगी। इन सभी बिंदुओं को कागजों पर स्पष्ट करने की मांग की गई।
रहवासियों का कहना है कि यदि पहले से उपलब्ध जमीन पर ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पर्याप्त संभावना है, तो उसे तकनीकी रूप से जांचकर सामने रखा जाए, ताकि किसी तरह की भ्रांति या आशंका न रहे।
अब निगाहें प्रशासनिक फैसले पर
विधायक के बंगले के बाहर स्थानीय लोगों के पहुंचने के बाद प्रस्तावित ऑक्सी जोन को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल रहवासियों की प्रमुख मांग यही है कि पहले नाप-जोख, फिर ड्राइंग-डिजाइन और उसके बाद पुनर्वास पर निर्णय लिया जाए।
अब देखना होगा कि प्रस्तावित ऑक्सी जोन की योजना को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या ठोस व्यवस्था सामने आती है।

