लीला देवी मंगवानी जाते-जाते दो जिंदगियों में भर गईं रोशनी…शोक की घड़ी में परिवार का अनुकरणीय संकल्प…!
बिलासपुर-[जनहित न्यूज़] शोक की घड़ी में जब अपनों को खोने का दर्द असहनीय होता है, ऐसे समय में मंगवानी परिवार ने ऐसा मानवीय निर्णय लिया, जो दूसरों के जीवन में हमेशा रोशनी बनकर रहेगा। ऋषि कॉलोनी निवासी श्रीमती लीला देवी मंगवानी के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनका नेत्रदान कराकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। लीला देवी के नेत्र अब दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजाला भरने का माध्यम बनेंगे।
मंगवानी परिवार का नेत्रदान के प्रति यह संकल्प नया नहीं है। परिवार ने इससे पहले पिता स्वर्गीय अमृतलाल मंगवानी और भाई स्वर्गीय हरीश मंगवानी का भी नेत्रदान कराया था। अब माता लीला देवी के नेत्रदान के साथ परिवार ने सेवा और मानवता की इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
दुख के बीच लिया रोशनी बांटने का फैसला
मंगलवार शाम लीला देवी के निधन के बाद उनके पुत्र मुकेश मंगवानी, दीपक मंगवानी एवं परिजनों ने दुःख को मानव सेवा के संकल्प में बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने लीला देवी की स्मृतियों को केवल अपने तक सीमित रखने के बजाय उनके माध्यम से किसी और के जीवन में उजाला पहुंचाने का फैसला किया और नेत्रदान के लिए हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के सदस्य सक्रिय हुए। सिम्स अस्पताल के डॉ. अनिकेत कांबले एवं डॉ. कुणाल की मेडिकल टीम मंगवानी परिवार के निवास पहुंची और सम्मानपूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
लीला देवी के नेत्र अब दो जरूरतमंद दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी का माध्यम बनेंगे। उनके जाने के बाद भी उनकी आंखों के जरिए किसी की दुनिया रोशन होगी—यह विचार ही इस पूरे प्रसंग को भावुक और प्रेरणादायी बना देता है।
नेत्रदान से बड़ा कोई मानवीय उपहार नहीं
हैंड्स ग्रुप के सदस्यों ने मंगवानी परिवार के इस निर्णय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में आज भी अनेक बच्चे, युवा और बुजुर्ग दृष्टिहीनता के कारण अंधकारमय जीवन जीने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों के लिए नेत्रदान किसी वरदान से कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का संकल्प है। एक व्यक्ति का लिया गया यह निर्णय दो लोगों के जीवन से अंधेरा दूर कर उन्हें दुनिया देखने का अवसर दे सकता है।
लीला देवी मंगवानी ने जीवन की अंतिम विदाई में भी यही संदेश दिया,इंसान चला जाता है, लेकिन उसके अच्छे कर्म और उसकी दी हुई रोशनी हमेशा जीवित रहती है।

